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23/02/2020

زخمی الفاظ

عزیز ناظرین. مدھشالے سے مراد وہ جگہ ہے جہاں سبھی عاشق جما ہوتیں ہیں. اور جام ے عاشقی کا پیالہ پی کر مدہوش ہو جاتیں ہیں.   


گھائل ہے آج میری شاعری
زخمی ہے جگر 
خونے دل سے بھیجتا ہوں 
پیغامے موحبّت 
دیکھ لو ایک بار تو ادھر 


نالا ہے انسے نہ رہیں ہمسے خفا  
مدہوش ہوے جاتیں ہیں ہم 
 دیکھ کر انکی یہ ادا
تیرے دیدار کے لئے ہوے قیام 
یا بیٹھے رہے پوشیدہ 



پیکر جام ے عاشقی 
نکلے جب مدھشالے سے 
 ہونگی تیری حدود صنم آوروں کے لئے
عاشقوں پر کیسے قید 
ہٹا دو حجاب کے  تمام پوشیدہ پردے 
ہو جانے دو مجھے بہیا 
 تو مجھ مے 
سما جائے مے تجھ مے سا جاؤں




بیخودی ایسی چھائی 
کے ہر چہرہ لگتا ہے پرایا 
ماشوق کی نظروں سے 
دیکھا تو ہرپرایا 
لگا اپنا سا 



تیری موحبّت کو بھا گئی 
محبوب کی چاہت 
تونے انھیں دیکھ لیا 
انہوں نے تجھے دیکھ لیا 
دیکھ لی جنّت 





अज़ीज़ नाज़रीनमधुशाले  से मुराद वोह जगह है जहाँ सभी आशिक़ जमा होतें हैं और जाम  आशिक़ी का प्याला पी कर मदहोश हो जातें हैं.

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ज़ख़्मी जिगर


घायल है आज मेरी शायरी
ज़ख़्मी है जिगर
ख़ूने दिल से भेजता हूँ
पैग़ामे मोहब्बत
देख लो एक बार तो इधर

नाला है उनसे ना रहें हमसे ख़फ़ा
मदहोश हुए जातें हैं हम
देखकर उनकी ये अदा
तेरे दीदार के लिए हुए क़याम
या बैठे रहे पोशीदा


पीकर जाम आशिक़ी
निकले जब मधुशाले से
होंगी तेरी हुदूत सनम औरों के लिए
आशिक़ों पर कैसी क़ैद
हटा तो हिजाब के तमाम पोशीदा परदे
हो जाने दो मुझे बेहया
तू मुझमे
समा जाए में तुझमे समा जाऊं


बेख़ुदी ऐसी छाई
के हर चेहरा लगता है पराया
माशूक़ की नज़रों से
देखा तो हर पराया
लगा अपना सा


तेरी मोहब्बत को भा गई
मेहबूब की चाहत
तूने उन्हें देख लिया
उन्होंने तुझे देख लिया
देख ली जन्नत

18/02/2020

میرے اشک تیرا عشق

میرے اشکوں کی محض 
تین سیرت      
تیرا عشق تیرا خوف اور انکی موحبّت 


تو ہی اوّل تو ہی آخر  
تجھی سے شروع تجھی پر ختم 
تو ہی ظاہر تو ہی باتیں 
تو ہی حاضر تو ہی ناظر 


مجھے کیا کرنا ہے جا کے کاشی کعبہ 
میں نے اس دل مے صنم کو بسا لیا 
جہاں دیکھا میرے صنم کو سر کو وہیں جھوکا لیا 


تیرے کوچے کو چھوڈ کر 
ہمنے ہر چوراہے ہر 
نککڈ  پر صنم کا گھر بنا لیا 
محبوب تھا جو کبھی میرے دل میں 
ہر گھر مے صنم کو پا لیا



ہے انتظار ہر دم تیرا 
دل میں بس گئی ہے وہ مورت 
تو چاہے کرے فراموش ہمکو 
ہمیں تو ہے ہر دم تیری چاہت 



تیرے عشق میں ڈوب کر 
کرتا ہوں جو سیاہ کاغذ
فنا فی شیخ کے فلسفے کو 
پورا کیا ہے اب.


تیرا انتظار ہی ہے اب میری عبادت 
تیرا دیدار ہی ہے اب میری ریاضت 
کتابوں کو دیکھنے سے کوئی عالم 
نہیں ہوتا 
الفاظ کی ادایگی سے کوئی 
فاضل نہیں ہوتا 
میرے صنم کے دیدار 
بغیر کوئی عاشق نہیں ہوتا 


تو ہے میرے ساتھ اس سفر میں بھی 
اس سفر میں بھی 
ملا دو مجھکو میرے صنم سے 
اس سفر میں بھی اس سفر میں بھی 


بیدرد زمانہ کیا جانے میری موحبّت کو 
گھایل کر دیا مارتے  ہو پتھر کیوں مجھکو 


ایک بار مل جانے دو 
میرے صنم سے مجھکو 
فر بتا دونگا ہوں میں کیا 
چیز تمکو 


قید کر سکوگے نہ تم مجھکو 
الفاظ میں نہ قلم کی سیاہے میں 
ہوا کا جھونکا ہوں میں 
اڈا کے لے جاونگا  تم سب کو 


عاشقوں کی بستی ہے یہ 
عشق والے یہاں رہتے 
 ہیں سبھی انکے حامی 
پس واحد پر یقین کرتے 


ہو گئی آج پوری منّت 
 تیرے نام پے  جی 
لوں میں تیرے نام پر مر  جاؤں 
تیرے نام پر فنا ہو جاؤں 
تیرے نام پر مٹ جاؤں 



14/02/2020

पाकीज़ा मोहब्बत, तुम तो प्यार हो, सजनी

मोहब्बत की इस दास्तान पर अलफ़ाज़ की अदाएगी
जिस दर्दनाक हालात से गुज़ारना पड़ा था शायर को इस मोहब्बत की वजह से, उसको अल्फ़ाज़ में बयान किया है.

अज़ीज़ नाज़रीन,

मुसन्निफ़ को अवाम एक निहायत ही सख़्त मिज़ाज, बदतमीज़ तस्सव्वुर करता हैबरक्स शायर का दिल और दिमाग़ इश्क़ हक़ीक़ी और इश्क़े मज़ाजी से लबरेज़ हैजहाँ लेखक चंद मुद्दों पर सख़्त है, वहीँ लेखक के दिमाग़ में शायरों वाली नज़ाकत और दिल एहसासात, जज़्बात और मोहब्बत से सराबोर है.   लेखक इस दुनियाँ का हिस्सा है, और कोई भी काम ऐसा नहीं करता है जो दुनियाँ से हट कर है. लेखक का आज का कलाम दोनों के इश्क़ पर मुन्नसर है



जी चाहता है, सफ़ेद कागज़ पर
लिख दूँ उनका भी नाम
वोह हैं आशिकी,
वोह है ज़िन्दगी
करूँ क्या उनपे सियाह कलाम.


अलफ़ाज़ की अदायगी से मोहब्बत बयां नहीं होती
सफेद कागज़ को सियाह करने से
मोहब्बत जवां नहीं होती
दिल में जो बस गई है उनकी सूरत
तो हर सूरत पर बात नहीं होगी. 


अब ना भेजा जाएगा कोई पयाम
और ना होगा कोई कलाम
बात करो माशूक़ की गली की
तेरा कूचा है गुलिस्तान (गुलिस्ताँ)


तेरा दीदार ही है अब मेरी मोहब्बत
तेरा इंतेज़ार ही है अब
उसकी इनायत
तीन सूरत हैं अब मेरी इबादत


उनको देख कर सुबह की आग़ाज़
तुझको देख कर, सियाह आग़ोश
शम्स को देख कर सफर का आग़ाज़
क़मर को देख कर तेरे पास


मेरी मोहब्बत है ना वाक़िफ़ गुमनाम
चकोर हूँ में
तू है चाँद
परवाज़ है मेरी तेरी मोहब्बत और
तेरे ही लिए हैं, मेरे रूमानी अलफ़ाज़.

ہر بچہ کرے گا سوال، کیوں نہ کرے بغاوت؟

 عربوں کو بھیجی گئی چوڑیاں ہوں انہیں مبارک ملت کے ساتھ جنگ میں جو ہوئے نادارِد یہود و نصاریٰ کے آگے سجدہ ریز ہو گئے رہبر افضل ہوتا تم ہو جات...