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24/06/2022

हिज्र की कैफ़ियत

भुलाना था बोहोत मुश्किल तुझे,

भुला ना पाए हम,

जब जब आया बहारों का मौसम

बोहोत याद आये तुम

तेरा हिज्र मेरे वजूद को झंझोर गया

तुझसे तख़्लिया मेरी रूह को ज़ख़्मी कर गया

 

शामे ग़रीबां आ गई, आँखों में अश्क़ दे गयी। 

हिज्र में तेरी सफर गुज़र गया 

तेरे दीदार को जुबेर तरस गया

दिल की बात करें तो किस से जा कर हम,

जिसको अपना समझा वही निकला दुश्मन

जो सूनाया हाल ग़म यार का

समझ बैठा में ही हूँ दिलदार उसके प्यार का।


तेरे हिज्र में हमने बहा दिए अश्क़ इतने,

ख़ुदा की मोहब्बत में गर बहाते उतने

दूर रहते हमसे दो जहाँ के फ़ितने

कुछ ही पल में वोह पास आ गए इतने

उनकी जुदाई के डर से लगे सुबह उठने 


में तेरे अश्क़ों की बनाई हुई तस्वीर हूँ

जो कभी ना मिट सके ऐसी तदबीर हूँ

तेरे साथ जुड़ी हुई तक़दीर हूँ,

कभी ना मिट सकेगा नाम तेरा इस दिल से

में ऐसी तहरीर हूँ।


Zuber

12/06/2022

शहीद कुफ्र की हिफाज़त में या इस्लाम की बक़ा में

आज की नज़म रांची के २० साला शहीद मुद्दसिर को वक़्फ़।


भाई हक़ मोहब्बत का अदा कर गया तू,

अपने नबी की मोहब्बत में शहीद हो गया तू, 

शोहदाओं की सफों में गया तू,

जामे कोसर पर नाम अपना लिखवा गया तू,


अज़मत पर रसूले अरबी की

जान अपनी निछावर कर गया तू।

रोज़ा ऐ मेहशर में पायेगा इसका अजर तू,

फ़ख़्र से नूरानी मुस्कुराएगा तू, 


अपने आक़ा से हरगिज़ ना शर्माएगा तू। 

जो थी तेरी आरज़ू रूख तो मिला लें 

मुहम्मद कभी तुझसे, 

तो पास उनको अपने पायेगा तू।  

 

तेरी मोहब्बत का है बड़ा ही मर्तबा

बिलाले हबशी के मर्तबे को पा लिया तूने

बिना देखे मोहब्बत निभाना सीखा दिया तूने

चकोर ने दे दी जान परवाज़ में अपनी

तूने पाई परवाज़ दे कर जान अपनी 

 

तारीख़ में लिखे जायेगें क़सीदे तेरे नाम के

भूला ना सकेगें एहले ईमान कारनामे नन्ही सी जान के

अब तू बन गया मुहाफ़िज़ जन्नत का,

जिसे चाहे भेज दे चाहे वोह हो गुनाहगार ज़ामाने का।


नहीं मिलता यह मर्तबा किसी कुफ्र की

सरहद पर मर मिटने पर हबीब 

कहाँ है वोह मुसलमान 

नहीं कहा एहले मसनद ने जिसको शहीद


हमारा शहीद तो इमामों की फेहरिस्त में है

जिसके हाथों में है कुंजी नफीस। 

 

इज़्ज़त से लो नाम इनका आज बने हैं यह दूल्हा

एक बना था कुफ्र की हिफाज़त में 

भारत का दूल्हा, मेरा यार बना है

फरिश्तों का दूल्हा  

 

जो मिला है तुझे खज़ाना,  इस्लाम की बक़ा में 

नहीं मिलेगा किसी भी मुसलमान को   

कुफ्र की हिफाज़त में मारे जाने पर।

Zuber

03/06/2022

दो फ़रिश्ते,

या रब मेरे मुहाफ़िज़ बना कर

भेज दिए दो फ़रिश्ते तूने

मेरे ग़रीब ख़ाने को क़ब्ल बेतुस सबा

बादेन बेतुन नसर बना दिया तूने


फतह का परचम लहरा कर किया सलाम

बादस्सालाम  पहुंचे दारुस्सलाम


कहाँ से आता है किधर हो जाता है ग़ायब, 

मेरा गुमनाम फ़रिश्ता, हर मुसीबत में हो जाता है हाज़िर,

उसको छूने को हर शख़्स है पागल, 

मदद कर रूहपोश हो जाना उसकी है आदत


सफ़ेद कफ़न सा उसका पैराहन

चेहरे पर ना कोई मायूसी ना कोई शिकन

दुशमन उसके सामने लगतें हैं अदन    


Journalist Zuber

ہر بچہ کرے گا سوال، کیوں نہ کرے بغاوت؟

 عربوں کو بھیجی گئی چوڑیاں ہوں انہیں مبارک ملت کے ساتھ جنگ میں جو ہوئے نادارِد یہود و نصاریٰ کے آگے سجدہ ریز ہو گئے رہبر افضل ہوتا تم ہو جات...