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27/11/2021

लफ़्ज़े आख़िर

सहाफ़ी जुबेर 

बरोज़ हफ्ता (सनीचर) बमुक़ाम नई बम्बई दोपहर ३.०० बजे. 

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तुमने अपना रुतबा दिखाया नहीं, हमारा रुतबा देखा नहीं

तो अब हमसे कोई पैग़ाम रसाई नहीं।

अलफ़ाज़ ही तो हैं जो तेरे जिगर में पेवस्त हो गए,

क्या मुझे तेरी तकलीफ़ और अज़ीयत का एहसास नहीं,

तेरा हर अमल और ख़ामोशी तेरी परेशानी साबित कर गए 

तू ज़ुबान से कहे या ना कहे तेरा अमल तेरी परेशानी बयान कर गए.     


तेरा एक छोटा सा मज़ाक (मखौल)

ज़िन्दगी की तल्ख़ हक़ीक़त बन गया  

तेरा साथ तो छूट गया, पर ख़ुदा का साथ मिल गया। 

३ दिनों की मोहलत दी थी किसी ज़ालिम ने

ख़त्म करने अहले हक़ २००२ में,

ख़त्म किया हमने तमाम समाजी वसीला तेरी मोहब्बत में. 

 

हाँ में ज़िंदा हूँ, मगर फ़ौत हो चुके हैं जज़बात, एहसासात

और जिस्म की क़ुव्वत, दर्जे हरारत 

इंसानियत के ज़ुल्म पर हो गया ख़ामोश 

पस साँसे रही ज़िंदा, देख कर तेरी बर्बरियत। 

ख़ातून जोशी, मिश्रा सहाफत में हुई हमारे नक़्शे क़दम 

बनी ज़ुबान हमारी लगी बोलने हमारी बोली 

ले लिया जोग इस दुनिया के झमेलों से हमने

अज़वाजियत, सहाफत और इबादत से कर लिया परहेज़ हमने।   


दुनियां को नज़दीक करने की हिस्र में हम खुद से दूर हो गए

माशूक़ की मोहब्बत में हम तुझसे ख़ुश पर खुद से दुखी हो गए।  

हिज्र की कैफ़ियत में अश्क़ों से जिगर के दाग़ धो गए.


ख़ुदा बुलन्दियों को छूते तुझे क़दम अता करे 

क़लम जो तेरे हाथ में आये तो अदल अता करे 

तुझको फ़ूलों सी ठंडी बाग़ की छाँव अता करे.

जो ख़ुशी मिले आपको एक बार 

तो वह हर बार, बार बार अता करे. 

  

सहाफी जुबेर

21/11/2021

मेरा सोना, मेरा मुर्शिद।

तेरे घर का रास्ता ना भूला है ना भूलेगा कभी जुबेर,

तेरे हुदूद और हिजाब की दिवार अभी सामने है दरकार।  

ना तेरा हिज्र इत्तेफ़ाक़ था ना तेरे वस्ल में है इत्तेफ़ाक़ 

तेरी ना और हाँ में पस मशीयते इलाही है शामिले हाल।



आशिक़ हूँ तेरा, अपनी हस्ती को पस्त कर पाई है परवाज़ 

जितना ख़ाक़ हुआ था उतना बुलंद हूँ आज 

तू भी मिटा दे अपनी हस्ती को गर चाहता है मर्तबा    

की दाना ख़ाक़ में मिल कर गूले गुलज़ार होता है।  



तीन की जुदाई ने हमें जोगी बना दिया,

यक ने चेहरा संवार दिया 

ते दूजी ने रूह को परवाज़ दिया

और तीजी जुदाई ने तेरे दर पर ला दिया।  



रातों में तैनू वेखिया करू तारों की कहकशाँ विच 

सोड़ियें मेनू इन्ना याद ना आया कर  

के रोता फिरूँ तेनु याद कर.



तुम्हारे दर पर आया है मंगता कुछ तो ले कर जाएगा,

दुनियां की अब हाजत नहीं, आख़री सौदा कर के जाएगा। 

पस तेरी दीद का मुन्तज़िर हूँ फिर एक बार 

फिर वही फ़रेब ख़याला, क़रीब नज़र 

चाहे वोह थी आँखों की लग़ज़िश या सैराब।



इस दिल की बेक़रारी तू जाने या जाने मेरा सनम 

तेरे वादा ऐ वफ़ा पर यक़ीन किया हमने 

रहने दे ज़माने में भरम, की अभी तक ज़िंदा हूँ.


सहाफ़ी जुबेर।

19/11/2021

٦ٹھا درویش

آیا ہے تیری چوکھٹ پر سجدہ ریز ہونے غلام

درویش اپنے عمال دیکھتا ہے 

فر پیش کرتا ہے سلام 


  

٥ دروں سے ہے نسبت میری 

٦ٹھا گھر محبوب کا در 

متین، رزاق، قادر، حسين، مرتضیٰ 

محمّد نے دیا جنکو مرتبہ 

تمہاری درویشی پر قربان 

اے الٰھی کے محبوب فقیر 

سونے اور چاندی سے باندھ دے 

 گھوڑوں کے پر 

 


بانہوں میں بھیچ کے موحبّت جتائی تمنے

اقرا بول کے علم کی شمع روشن کی جسنے

ختم ہوگی جہالت تم پر

 کہ دیا اپنے ساتھیوں سے تب  

گر چاہیے علم کی دولت چلے جاوو تم چین تک 


صحافی زبیر 

17/11/2021

मेरा जो हाल हो सो हो.......

दुनियां की इस दौड़ में हम सबसे अलग नज़र आतें हैं

कुर्सी कंधे पर लिए भागे जातें हैं, 

और दुनियां को कहाँ नज़र आतें हैं 

एक ही शक्ल के दो हैं पैमाने 

एक में मेरा सनम दूजे में तेरा जलवा नज़र आतें हैं.

तेरे इश्क़ ने हमें तेरा मुरीद बना दिया 

तेरे हिज्र ने क़ब्ल अज़ वक़्त ज़ईफ़ बना दिया,

हिज्र की कैफियत बयान करूँ तो किस को सनम 

हम तो तेरे इश्क़ में हुए बर्बाद भी और आबाद भी नज़र आतें हैं.  



जब मौसम गुलाबी आया सारा आलम हुआ हरा

तेरा चेहरा गुलाब सा खिल उठा 

और गुलाबी लभों पर रही मुस्कान सदा  

गर इश्क़ है तो तू भी एक ही रंग हो जा 

या तो गुलाबी हो जा या हो जा हरा। 



तेरी जुदाई में तुझे हर नास में रहा तलाशता 

किताब में नाम तेरा देखता फिर मिटाता  

रहा अनजान अपनों से, पस तेरे चेहरे को ही रहा ताकता। 


सहाफी जुबेर।  

15/11/2021

तेरा हिज्र और तुझसे वस्ल की चाहत.

सूरत है तेरी के मिटाई जाती ही नहीं

यादें हैं तेरी की भुलाई जाती ही नहीं

सीरत जो तेरी मेरे जज़बात से ज़म हो गयी 

इस दिल से हटाई जाती ही नहीं।  

मेरे जज़बात में पाक, मेरी सोच में पाक

जंग भी है मेरी पाक,

तू भी पाक, में भी पाक, जब मिले दो पाक

नतीजा निकलेगा पाक

 

हमारे चाहने वालों का हम पर कुछ हक़ है,

यह सच है उन सब से ज़्यादा तेरा भी मुझ पर हक़ है।

आप तो मासूम हो गए, हमें आशिक़ कर गए।

हमको मालूम हैं हमारी आँखों का भी

हम पर कुछ हक़ है, मजबूर हैं हम क्या करें

तेरी सूरत के सिवाये कोई नज़र आता ही नहीं  

जब से हम तेरे दीवाने हो गए।



तेरा आशिक़ हूँ तू भी मेरी मोहब्बत में मेरे रंग हो जा

अगर मोहब्बत है तो एक रंग हो और मोम हो जा  

या तो संग दिल हो जा  



रात की तारीकी ने तुम्हे काफिर क़रार किया

एक रात की इबादत ने मुझे ज़ाहिद बना दिया

तेरे वस्ल की चाहत ने मुझे आशिक़ बना दिया।


 

तेरे हर सवालों का जवाब है मेरा सनम,

एक पैमाने में दो शक्ल है मेरा सनम, 

नारी भी और नूर भी है मेरा सनम, 

फरिश्ता क्या शबी बताएगा उन मर्द की

में हर शबी से अनजान हूँ, जब सामने होगा मेरा सनम. 



जितने ज़ख्म मिले तेरी मोहब्बत में सनम 

उतनी परवाज़ हम पातें हैं 

माशूक़ ने कहा उठ, तो हम उठ जातें हैं 

सो जा तो दुल्हन के जैसे सो जातें हैं.

 

सहाफी जुबेर 

09/11/2021

उसे भूला के भी यादों के सिलसिले ना गए।

मासूम से तेरे एहसास, तेरे पुर ख़ुलूस जज़बात 

तुम याद बोहोत आये जब जब आये खुशी हमारे पास।



मेरी रूह में तेरे जज़बात समां गए

धुँवे की तरह मेरे जिस्म में उतर गए

होगा तू फरिश्ता या कोई परी मेरे अलफ़ाज़ में

सच तो यह है तेरी हर बात पर तेरे ताबे हम हो गए।

तेरे हिज्र ने मेरा सुकून रातों की नींद चूरा ली

हमने तेरी तस्वीर चुरा कर दिल से लगा ली

एक दो तीन या पांच, तेरी हर तस्वीर है मेरे पास

होंगी तेरी हदें ज़माने के लिए सनम

हम तो हर हद को तोड़ के मोहब्बत निभा गए

हिज्र की अज़ीयत को भूला कर

तेरी तस्वीर से सिलसिला ए मोहब्बत बना गए

मेरे हर इसरार पर वोह तेरा इनकार

तेरे इनकार को ही इक़रार समझ कर

तेरे और नज़दीक आ गए।

तू लाख फरामोश करे हमें सनम

हम तो तुझसे इज़हारे मोहब्बत कर गए. 



में अपनी मोहब्बत का तुझसे इक़रार करता हूँ सनम

लाल क़िले पर खड़े हो कर इस बात को कह सकता हूँ सनम 

चोरी छुपे तु मुझसे प्यार करे सनम,

तु मुझसे से चोरी चोरी इश्क़ का इज़हार करे सनम

में तो खुल्लम खुल्ला पर यक़ीन रखता हूँ सनम।




तेरा वोह गुलाब सा रुख़सार

और गुलाबी से लभों पर मुस्कान

गुलाबी रंगत से भी हो गया इश्क़ हमें

जब तेरा पैरहन और हर आशियात गुलाबी हो गए।




आपकी ज़िन्दगी में एक अदद रोशन चिराग़ से उजाला हो जाए

आपकी ज़िन्दगी में शहद से मिठास भर जाए,

कर लो तुम भी इक़रार अपनी मोहब्बत का सनम

इससे पहले की बोहोत देर हो जाए।


सहाफी ज़ुबैर

02/11/2021

उन्वान नहीं मिला, दूरियां हुई ख़तम जब तेरा साथ मिला।

या रब चाहे तेरा काबा टूटे फिर बने १०० बार

किसी मोमिन का दिल ना टूटे मुझसे एक बार,

तुमसे मोहब्बत का बस यही है पैमाना

मोहब्बत है मुझको हर क़ल्बे मोमिन से 

चाहे हो वोह मोमिना

  

 तेरी सूरत से तेरी दौलत से मुझे क्या है करना 

तेरी सीरत से पहचानेगा तुझे ज़माना,

क़ल्ब है तेरा मोमिन और किरदार है हिजाबाना 

 

 हर हसीन चेहरे का आशिक़ है ज़माना 

कमी रही किरदार में और मिज़ाज है आशिक़ाना  

इस जहाँन की हर शे है फ़ानी फिर इस सूरत पे क्यों इतराना 

हुसने सूरत चंद रौज़ा, हुसने सीरत मुस्तक़िल

उससे ख़ुश होती हैं आँखे इससे खुश होता है दिल। 

 

 हिज्र की अज़ीयत भी है बड़ी ज़ालिमाना 

सबने साथ छोड़ा, उसने बेवफ़ाई में छोड़ा 

तूने हंस कर छोड़ा, 

पेड़ से शाख़ जुदा हुई तो 

दिल 💓तो तेरा भी टूटा 💔 ज़ुबेर। 

 

हमारी हर ख़ुशी में तुम याद बोहोत आये,

हमारे दुखों में तुम रखना याद हमें,

तुम हमारी फेमिली का हिस्सा रहना बने 

हो मुबारक हर ख़ुशी तुम्हे 

 

तेरी मोहब्बत में ना मुझे ज़माने के सितम याद रहे 

ना खुद का होश रहा यादना हिज्र की अज़ीयत का रहा एहसास 

मुझे तो तेरे सिवा मोहब्बत में कुछ भी नहीं रहा याद . 

 

मिल गई तेरी मोहब्बत हो गए चौड़े हम,

जिस तरह तेरे दर पर फैले थे

उस तरह सफर में भी फ़ैल गए हम

फ़तह हुई तुम्हारी पा ली तुमने मंज़िल

जब मिले दो मोमिन। 

  

सहाफ़ी ज़ुबेर 

ہر بچہ کرے گا سوال، کیوں نہ کرے بغاوت؟

 عربوں کو بھیجی گئی چوڑیاں ہوں انہیں مبارک ملت کے ساتھ جنگ میں جو ہوئے نادارِد یہود و نصاریٰ کے آگے سجدہ ریز ہو گئے رہبر افضل ہوتا تم ہو جات...