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30/11/2023

इश्क़ है हमारा अकबर

तन्हाई में माशूक़ से सरग़ोशी का लुत्फ़ ही अलग है

कभी उसकी बातें सून कर बेइख़्तयार हस देता हूँ

कभी अपने गुनाहों को याद कर रो देता हूँ

 

दीवानों सी कैफ़ियत रहती है तन्हाई में तेरी महफ़िल में सनम

कभी हस देता हूँ कभी रो देता हूँ

 

रूख़ को बिगाड़ लिया ग़ैर की निगाहों से ख़ुद को छुपाने को तुमने 

तुम्हारी बातिनी कैफ़ियत छुप ना सकी, ईमानी दर्जे से ज़ाहिर हो गई 

नूर ज़ाहिर हो गया चेहरा रोशन हो गया 


हम हर इंसान से मोहब्बत हैं करते, 

हर ख़ातून पे हैं करते नाज़  

नाइन्साफ़ हमारे दुश्मन ज़ालिम पर करते वार 


तुम्हे करने बर्बाद तीन हदफ़ ज़ालिम के हुए थे तय्यार

बर्मा हुआ बर्बाद, यहूद ग़र्क़ाब, कुफ्र को कर लो फ़तह


दो अलफ़ाज़ की जलन अस्लहा की मार से तेज़ धार

लंगूर, लँगूरनियाँ, ज़ालिम हुए सुन कर घायल और परेशान 

१५ मिनिट आतिश बाज़ी होगी, घड़ी है मेरे पास 


है तनक़ीद की पूरी गुंजाइश यक़ीन हमें तंज़ीम पर 

मोहब्बत है हमारे रहबर से इश्क़ है हमारा अकबर 


पेशकर्ता जुबेर अहमद खान सहाफ़ी

27/11/2023

तूने मोहब्बत का हक़ अदा कर दिया

 तूने मोहब्बत का हक़ अदा कर दिया आक़ा का नाम रोशन कर दिया 

मोहब्बत का पैमाना है वही अपने रहनुमा पर जान कर दे क़ुर्बान 

वोह रहनुमा पीर हो या मुहम्मद सल्लम पर नाज़िल क़ुरान 


यहूद नसरानियों को हुई हसद देख मुस्तुफ़ा का अदब 

और दौर ए यलग़ार में दीवानों का पैमाना मोहब्बत  

क़तरा ज़मीन पर गिरने ना दिया अपने वजूद से लगा लिया 


अपने रहबर के लिए अदब और मोहब्बत आला पैमाना देख कर 

यहूद को गर जंग जीतना है तो फ़ैला दो इन्तेशार इनके अंदर 


यहूद ने खड़ा किया ग़द्दार सऊद में 

शुरू हुई उसकी बदगुमानी की ख़बासत दरवेशों से 

ख़तम ना हुई उस ग़द्दार सऊद की ख़बासत महज़ सहाबा पर  


पहुंची उस मुनाफ़िक़ की ग़लीज़ नियत ख़ातून ए जन्नत अज़वाजे मुहम्मद तक 

आख़िर में किया बदगुमान मुसलमान को मुहम्मद नस्ल ए मुहम्मद पर    


सहाबा से साबित नहीं क़ुरान से साबित नहीं 

नबी ने नहीं मनाया सहाबा ने नहीं बनाया तुम क्यों बनाते हो 


इनका फ़लसफ़ा यही नहीं रूका 

नबी से मांगना गुनाह सलाम भेजना गुनाह 

इल्म ए ग़ैब नहीं मेराज महज़ ख़्वाब ख़याल 


आज हालात हो चुके हैं हर मुल्क में मौजूद मुनाफ़िक़ ग़द्दार यहूद के ग़ुलाम

सहाबा की करतें हैं बात पर बताते नहीं मोहब्बत का वोह मेयार 


जब मोहब्बत हुई बदनाम तब जंग जीतना उनके लिए था आसान 

अब हो गया सऊदी यहूदी का ग़ुलाम

जहाँ से पैदा हुआ इस्लाम उसने ही की ग़द्दारी

चूरा चूरा कर दी ख़िलाफ़त ए उस्मान   


हुए वोह कामयाब जिन्होंने अश्क़ बहाए इश्क़ ए यार में 

दर्ज हुआ उनका नाम मोहब्बत की किताब में 

तुम हो रहे रूसवा ज़लील कर के ग़द्दारी अपने ही रहबर से 


यह मोहब्बत भी बड़ी ही ज़ालिम शे है

मर जाता है आशिक़ माशूक की फ़िराक़ में  


मोहब्बत का है अपना ही फ़लसफ़ा, 

तेरी मोहब्बत में यह सर ना झुका 

माशूक़ की मोहब्बत में तेरे आगे झुक गया 


जन्नत की चाहत में नहीं, मिल्लत की बक़ा के लिए 

एक एक गुनाह तर्क करता गया 

उम्मत फ़लाह पाती गई मुझे उरूज मिलता गया 


 सहाफ़ी ज़ुबेर

26/11/2023

माशूक़ से वस्ल की चाहत।

मारते रहेगें जितने आयेगें सब को मारते जायेगें 

ज़ालिमों की हलाकत पर उनके रहनुमा आँसूं बहाते रहेगें  

 

अरब की नस्लों में मौजूद हैं मुनाफ़िक़ कुफ्र यहूद और नसरानी 

हलफ़ के बादशाह का मुनाफ़िक़ था मुशीर सलीबी नसरानी 

 

तेरे नाम से शुरू की थी इस जंग को 

एक एक हदफ़ फ़तह होता गया में आगे की जानिब बढ़ता गया 

कभी था शैतान का हामी और नापाकी मेरा साथी 

अब गवारा नहीं बग़ैर वज़ू से एक पल भी रहना मुझको 

 

इश्क़ तेरा सर चढ़ कर बोल रहा, दुश्वार हो गया छुपाना मेरा  

कब तक रहूँ इस आलम की क़ैद में अब तो दीदार ए यार करा 


बोहोत सख़्त इम्तेहान से गुज़र गई उम्मत ए मुसलमाँ

अब नतीजे का वक़्त आ गया 

ख़ुदा ऊरूज देता है उनको जिन्होंने इम्तेहान अपनी ज़हानत से दिया  


फ़िराक़ की अज़ीयत हुई ख़तम अब वस्ल का आग़ाज़ हुआ 

हिजाबी बच्चिओं को मिलते देख अश्कों से चेहरा भीग गया मेरा 

में रहा वही ख़ुदग़र्ज़ उनके मिलन को देख, माशूक़ से वस्ल को सजा बैठा 


या ख़ुदा शुक्र तेरा अदा करूँ, या उन मुजाहिदों को कहूँ शुक्रिया 

सब कुछ भूल कर हमने तो माशूक़ का हाथ थाम लिया 


यह सिफ़त नूरानी है यह हौसला रहमानी है 

बग़ैर इबनुल अरबी के ग़ाज़ी को बग़ैर मोईनुद्दीन के ग़ोरी को 

मिलती नहीं फ़तह 


अपने नफ़्स की जिहाद तू फ़तह कर चूका 

अब आगे की जानिब बढ़ तूने मेहबूब मदीना को ख़ुश किया 

जंग में जो भी किया जाईज़ किया 

हिकमत से काम किया फ़ौजिओं को हलाक किया


दुश्मन के अवाम को गिरफ़्तार कर, अपने यर्ग़मालों को छुड़वा लिया 

क़ैदिओं के साथ हुस्न ए सुलूक किया आक़ा की हदीस को ना पामाल किया 


तूने मोहब्बत का हक़ अदा कर दिया आक़ा का नाम रोशन कर दिया 

मोहब्बत का पैमाना है वही अपने रहनुमा पर जान कर दे क़ुर्बान 

वोह रहनुमा पीर हो या मुहम्मद सल्लम पर नाज़िल क़ुरान 


सहाफ़ी ज़ुबेर

25/11/2023

नई इमारतें तामीर करो

 नेज़ा जो पेवस्त था ज़ालिम का क़ल्ब ए मोमीन में

उखाड़ कर फ़ेंक दिया निजात मिली बरसों की मशक़्क़त में

माशूक़ की कर आरज़ू, गर मदद ख़ुदा से ना मिले  

चिराग़ जिसका तूफ़ानों में भी हो रोशन, ख़ेमा जिसका ना उड़े   

वोह चिराग़ क्या बूझे जिसको ईंधन रब की मोहब्बत का मिलता रहे

ज़ाहिर के चिराग़ हुए गुल, बातिन के चिराग़ रोशन रहे


पाक ज़मीन पर मौजूद था ग़ुलाम ए बातिल

नाम में जिसके शरीफ़, फज़ल में जिसके रेहमान 

मुजाहिदों के हौसलों, शमशीर को तोड़ ना सका नस्ल ए ज़ालिम  

एक जानिब अकेला मुजाहिद दूसरी जानिब ग़ुलाम ज़ालिमों के ज़ालिम 

ग़ुलाम है की करता बातिल पर भरोसा 

मुजाहिद है जो अल्लाह के सिवा किसी से ना डरता 

शरीफ़ों का ख़ुदा हो गया मग़रिब और अमेरिका 

अहकाम ए ख़ुदावन्दी तर्क किया पाक ज़मीन को बेच दिया 

ख़ौफ़ ख़ुदा से तू ना मरा ख़ौफ़ ए बातिल से मर गया। 


ना कर सके तुम अपने मुल्क को ख़ुदमुख़्तार

ग़ुलामी रही फ़ितरत में शरीफ़ों के और ज़ालिम से वफ़ादार

सर-ए-तस्लीम ख़म हुए उसके हर हुकुम पर 

मुख़ालेफ़त की नहीं कोई सूरत


एक मर्द मुजाहिद ने ना क़ुबूल की बातिल की ग़ुलामी 

तमाम शरीफ़ हो गए उसके मुख़ालिफ़ फिर भी मीज़ान रहा उसका भारी  


दुश्मन ए ईमान ने ली ज़ालिम के हरम की ग़ुलामी

मुजाहिद लड़ता रहा ना-हक़ बात ज़ालिम की ना मानी

तेरा जज़बा ईमानी क़ुव्वत देख रब ने तक़दीर बदल डाली

अहल ए आलम के लिए जो थी दुश्वारकून,रब ने कर दी तुम्हारे लिए उसमे आसानी 


नई इमारतें तामीर करो चढ़ा दो नया रंग रोग़न


सहाफ़ी ज़ुबेर

23/11/2023

पनौती

बदनाम ज़माना हुआ नाम पनौती

काम किये जब हराम तो हुआ तू पनौती

लूटिया डूबोई, धूतीया (धोती) भिगोई जब आई चीन से चूनौती 


सौंप दी ज़मीन उसको जब लाल हुंकार भरी चीन ने साहसी 

कियों हैं इतना ख़फ़ा ख़फ़ा से ज़ाफ़रानी सुन कर नाम पनौती 

पद की गरिमा उसने भी तो नहीं निभाई की अदना बोली 


नाम बदलने की है उनको बोहोत जल्दी 

बदल दो नाम उसका भी ......दी से पनौती 


तिलमिला गए तमाम ज़ाफ़रानी और भाजपाई सून कर नाम पनौती 

सदन में किसी को कह दो भड़वा, कटुआ और आतंकवादी 

यह सब सून कर भी तुम करते रहे ठिटोली

जब तुमको मिला माक़ूल जवाब हुए परेशान सुन कर नाम पनौती 


दूसरों के लिए तमाम क़ायदे जब तुम पर आये तो हुई फजीती 

फटे निकर में टांग घुसाने की है इनकी आदत पुरानी 

हम से कहो बाबरी छोड़ दो फ़लस्तीन से कहो ज़मीन 

दूसरों पर कहना है बोहोत आसान 

तुम क्या क्या उनके लिए छोड़ते 

क्या दोगे उत्तराखंड या गोवा की ज़मीन  


ज़ाफ़रानियों में नहीं इतनी क़ुव्वत उसको करें तस्कीन 

लुगाई को देख ऐसे भागते जैसे गधे के सर से सींग

तुमको क़िस्मत वाला चाहिए या बदक़िस्मत दी थी तुम्ही ने चुनौती 

देहाती औरत आंसूं बहाये काहे परेशान हुए सुन कर नाम पनौती 


कूल्हे बाज़ ने पेश किये अपने कूल्हे 

जब आया बीच में पनौती तब जीती बाज़ी तुम हारे

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

१५ लाख वोह एक जुमला था

 सरहद फिर से गर्म हो गई है

फिर से आतिश बाज़ी शुरू हो गई है

इन्तेख़ाब की घड़ी जैसे जैसे क़रीब आ रही है

गोली बारी फिर से तेज़ हो रही है 


चौबीस आ रहा है चुनावी जुमला फिर ला रहा है 

फिर से वही लोग तुम्हारे बीच आयेगें 

 तुम्हारी नस्लें ग़ुलाम हो जायेगीं झूठ फ़ैलाएगें 

कभी ज़हरीली बातें बतायेगें कभी मज़हबी मवाद फ़ैलाएगें

फ़लही काम कितने किये वोह ना बतायेगें   


कुछ काने दज्जाल बातों को घुमायेगें 

कुछ बरहना जिस्म तुमको लुभायेगें 

तेजस की बात पर पेट्रोल की तरह भबक जायेगें 

सून लिया आपने सरकार हम और आप थोड़ी बनायेगें 

सरकार तो यह बनायेगें।  


भगत राम हर फ़रेबी की दुखती रग पर हाथ धरता 

फ़ौरन तिलमिला जायेगें, हाँ मेने की थी पर अब नहीं करता

पूछ मारेगा मेरी, तिहाड़ी बढ़ते पेट्रोल के दाम के फायदें बतायेगें 


साधू के भेस में यह कौन शैतान आया 

अपनी अपनी बिटियाओं को छुपा लो घर में 

ज़ाफ़रानी पहन कर फिर रावण आया 

हलाल से है नफ़रत इनको हराम करने आतंकवादी आया 


राम के नाम को जो कलंकित करते 

गला फाड़ कर मर्यादा उसकी भंग करते

दूर करो हर जगह जय श्री........ चिल्लाने वालों को 

जूते मारो इन पाखंडी दलालों को


चूड़ी भेजी थी कभी सिलेंडर वाली बाई ने 

हर दुसरे रोज़ गली नुक्कड़ पर बैठ मुज़ाहिरे किये ताई ने 

पराये पती पर डाका डाल सुला दिया रज़ाई में  

ख़ामोश हो गई ज़ुबान मोटी हुई बुद्धि जब लाठी उठाई जवाई ने।


१५ लाख वोह एक जुमला था 

ढप्पा कहाँ लगाना है कहीं नहीं कोई कमला था 

इन्तेख़ाब में फिर से सब कुछ ना जाइज़ करने का है इरादा 

फिर से फ़ौजिओं के सर क़लम करने का है इनका इरादा 


सहाफ़ी ज़ुबेर

18/11/2023

हया का दामन ना छोड़ो

 मेरे इश्तिआल को मेने क़लम पर उतार दिया

तहरीर कर काग़ज़ को सियाह कर दिया

बेइख़्तयार क़लम हो गई ज़हरीले हालात देख के

मज़मून की हक़ीक़त खोल दी फ़रेबी सियाही से लिखी किताब देख के 

सफ़ेद वरक़ पर उतर आया जो हक़ीक़ी बयान

उन्होंने जुर्म की हक़ीक़त बयान कर दी मंज़र तब्दील होते देख के  


हुकूमतों की मिली भगत से जो हासिल की थी  

  अहल ए अरब की ख़ुफ़िया मालूमात मुलाज़िम बन कर

क़ाबिल ए दार हुए वोह यहूद और कुफ्र के जुर्म में शरीक बन कर 

ना मुलाज़िम रहे ना रहे आज़ाद क़ैद हुए दार मुजरिम बन कर


ग़ैरुल्लाह से मदद मांगने का शिर्क बड़ा है 

जब ख़ुदा ख़ुद ही कहे मांगो ग़ैर से तो शिर्क कहाँ है

हक़ है कलाम जो कहता है मदद मांगों सबर और नमाज़ से 

ना यह ख़ुदा है ना वोह ख़ुदा है


ख़ुदा जिससे मोहब्बत करता उस ही से मदद मांगने को है कहता 

शैतान, ज़ालिम से नफ़रत वलिओं से मोहब्बत है करता 

तभी वलिओं को ना कोई ख़ौफ़ ना ग़म ख़ुदा ख़ुद है कहता 


हया का दामन ना छोड़ो गर ख़ुदा हो मेहरबान 

हया ईमान का है ज़ेवर निस्फ़ ईमान 


अहल ए अरब ने छोड़ दी हक़ बयानी, क़रारदार नाफ़िज़ किये लायानी

 हया का दमन तर्क किया पहन लिया बे-हयाई का कफ़न  

 बुर्क़ा बर्बादी ए नस्ल कर कर दिए जज़बात दफ़न 


क्यों रोते हो ए मुसलमान किसी और ख़याल से 

वोह ख़ुश हो रहें हैं दीदार ए यार पे 

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

17/11/2023

तू सिर्फ़ मेरे लिए है

पाकीज़ा अवाम के पाक हैं फ़लसफ़े

आज़ान है नाम में, ना टूटेगें दोनों के रिश्ते


ना जाने क्या होगा हम गर तुझसे जुदा हुए

क़ासिर हूँ अलफ़ाज़ से बयान करना

मर जाऊँगा गर रब सबर ना दे दे


सफ़ेद वरक़ है मेरी ज़िन्दगी, जो भी चाहे लिख दे 

तेरी मोहब्बत में जो मिलेंगे अलफ़ाज़ तहरीर होंगे वही


मेरी आशिक़ी है यह तुझसे 

तेरी हिकमत अमल बोहोत देख लिया मेने 

तू भी मुझ पर है फ़िदा बस अब यह कह दे 


नहीं भाता कोई दूजा चेहरा तू सिर्फ़ मेरे लिए है यह कह दे 


सहाफ़ी ज़ुबेर

11/11/2023

तेरे नाम, मेरे अश्क़

मेरे अश्क़ मेरी मुस्कुराहट से ज़्यादा अज़ीम हैं 

मुस्कराहट सब ही के लिए है, मेरे आंसूं सिर्फ़ तेरे लिए वक़्फ़ हैं।

 

सिर्फ़ आंसूं नहीं लिख दूँ ज़िन्दगी का हर गोशा तेरे नाम पर

बेख़ौफ़ हो जाऊं मेरे लिए तुझको रब से मांग कर 

फिर ना हो तुझे पाने की फ़िक्र ना हो तुझ से फ़िराक़ का डर 


साबिक़ थे वोह इंसान मुसलमान बने साबित क़दम हो कर  

आज के दौर में तुम ख़्वार हो रहे बे-ईमान हो कर


मुअज़्ज़ज़ घरों की आबरू बेपर्दा, बरहना हो गई तहज़ीब के नाम पर

मस्जिदों के वारिस रक़्स कर रहे मूसीक़ी, तफ़रीह के नाम पर 

तुम में से कोई तो है आज भी क़ाबिल-ए-एहतिराम आला तालीम पा कर 

क़ाबिल ए दार ज़लील हो रहा सज़ा पा कर 


रक़्स करना है गर फ़ितरत तुम्हारी 

चले आओ किसी माशूक़ के मैख़ाने में 

दोनों जहाँ मिलेगें रक़्स पर उसका हाथ थाम कर


अहल ए अरब ही थे जो मुहतरम हुए मुसलमान हो कर 

तुम रुसवा हो रहे यहूद नसारा की बनाई धून को 

अपना ईमान जान कर    


इख़्तेयार किया उन्होंने ईमान ज़िन्दगी में फ़लसफ़ा क़ुरान जान कर 

 तर्क किया क़ुरान तुमने आलिम हो कर


करते हो रब से तवक़्क़ो करामात हो जाए    

ज़रा अपने अमल पर नज़र भी हो जाए 

करामात आज भी होगी ए मुसलमान 

गर तू अपने गुनाहो पर पशेमान हो जाए 


हर अमल पर कर तू अपनी नज़र ए सानी 

सहाफ़त की किसी लुग़त पर तेरा अमल मुजल्ला हो जाए 

किसी शायर या अदीब के लिए तू मख़सूस हो जाए 

अशआर क़लमबन्द किये जाए तेरे नाम पर ए मुसलमां 

तू भी मशहूर हो जाए मक़बूल हो जाए


 सहाफ़ी ज़ुबेर

09/11/2023

रब की रेहमत से मायूस ना हैं

 तेरे इश्क़ में कहाँ कहाँ भटक आये हम

तुझको पाने की चाहत में कभी काबा कभी मदीना चले आये हम


तुझे देखने की आरज़ू हुई इसलिए तुझे बुला लिया मेने 

तेरे दीदार पर ज़माने को भूला दिया मेने 


वोह चिलमन में बैठे रहे 

हम उन्हें देखते रहे वोह हमें देखते रहे 


आँखों से झलक आये जो अश्क उनके भी फ़िराक़ ए यार में 

रब की रेहमत से मायूस ना हैं इतनी अज़ीयत पा कर भी 


उनके बहते अश्कों पर रब अपना जलवा दिखाएगा 

अनहोनी सी जो बात है अहल ए आलम के लिए उनको पूरा कर पायेगा 


सहाफ़ी ज़ुबेर

05/11/2023

ख़ामोशी से रब के हुज़ूर आंसूं बहाना

जहाँ अक़ल ख़तम होती है वहां से तेरी हिकमत शुरू होती है

जब सभी दरवाज़े बंद होतें हैं तेरी रेहमत हज़ारों दरवाज़ों पर भारी होती है

 

कभी तकलीफ़ में ना तोड़ना हौसला अपना ए पाकिज़ा फौजी

हर आज़माइश के बाद रब के इनामों की शुरूवात होती है

 

जो रक़्स कर रहें हैं अहल ए अरब बरहना जिस्म पर

उनकी पेशी रब की बारगाह में होगी

 

तू ना ग़म कर ना ३ दिन से ज़्यादा सौग मना ए अहल ए ईमान

ग़म की काली रात कभी तो ख़तम होगी

 

जिनका काम था अपने कूल्हे मटकाना

उन्होंने अपना किरदार मौसीक़ी पर रक़्स कर दिखाया

तेरा काम है हक़ बात फ़ैलाना, तू अपना किरदार तेरे अमल से बता दे

 

ज़हरीली हो चुकी हैं ख़ूब हर ख़ित्ते की फ़िज़ाएं

जो तेरा हमदर्द हो मोहब्बत की बात उस ही को बताना

 

अपना ग़म आलम पर आशकार करने से बेहतर है

ख़ामोशी से रब के हुज़ूर आंसूं बहाना

जो तेरे ज़ख्मों को देख कर भी ज़ालिम की करे ताईद

ऐसों से अलहदगी इख़्तेयार कर सब कुछ रब को बताना

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

ہر بچہ کرے گا سوال، کیوں نہ کرے بغاوت؟

 عربوں کو بھیجی گئی چوڑیاں ہوں انہیں مبارک ملت کے ساتھ جنگ میں جو ہوئے نادارِد یہود و نصاریٰ کے آگے سجدہ ریز ہو گئے رہبر افضل ہوتا تم ہو جات...