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13/10/2024

आरज़ू मेरी अज़ान है

क़ैद लगा दी सय्याद ने आना नहीं कू--यार में,

आरज़ू मेरी अज़ान है क़फ़स कहाँ मेरी हसरत थी

तेरे इलज़ाम में भी तल्ख़ हक़ीक़त थी

पर हमारी मोहब्बत कहाँ वालिद के जैसी थी

 

बोहोत तन्हा हो गया हूँ तेरे जाने के बाद

ख़ुश हुआ दुश्मन हमारी जुदाई के बाद 

यही तो है फ़ितरत शैतान की

ख़ुश होता है दो दिलों को जुदा करने के बाद


कब तक में पराये कन्धों का बनूँ सहारा

परवाज़ मेरी इतनी बुलंद कर ख़ुदारा

जहाँ चाहूँ पहुँचूँ दोबारा

 

में चेहरे पड़ता रहा दूसरों की तकलीफ़ का

ख़ुद का चेहरा पड़ पाया

बदल सका लिखा अपने नसीब का

जो आईना दिखा ना सका तक़दीर में लिखा मेरे नसीब का

चेहरे पर अक्स साफ़ नज़र गया  मेरी तकलीफ़ का

 

 सहाफ़ी ज़ुबेर

12/10/2024

सुन कर मेरी अज़ान

या रब मुझे ज़ुबाँ दे दे ऐसी, जो जिरह करे अपनो की

या रब मुझे इल्म दे दे ऐसा जो मजलूमों के लिए जंग लड़े क़ानूनी


ख़ुदा को भूल गए इंसान को ख़ुदा बना लिया हमने

दरवेशों की सोहबत छोड़

बुतों को सजदा कर दिया हमने

 

हुजूम अदब से खड़ा हो गया सुन कर मेरी अज़ान

ख़ातूनों ने सर ढँक लिया सुन कर नाम अज़ान


हीरे की तलाश में पत्थर कई तराश दिए हमने 

संगतराश ने मुजस्समा ऐसा तराशा हर बुत

में अक्स तेरा ही पाया हमने


मयकदे में भी जा कर देखा, बुतखाने में तुझको तलाशा

मस्जिद में तुझको ना पाया काबे में ना देखा

है और कौन सा घर जहाँ तुझको ना तलाशा

नज़र झुका कर जो देखा दिल का काशाना 

तुझको वहीं पर पाया हमने


तेरी मोहब्बत में हर मुश्किल सेह गए 

अलफ़ाज़ ही तो हैं जो ज़ख्म ऐ रूह कर गए 

पत्थर जैसे ख़ामोश जिगर को मोम सा कर गए


सहाफ़ी ज़ुबेर

07/10/2024

आरज़ू मेरी अज़ान है

  बनाने वाले मुझे फ़िर से बना दे

क़तरा क़तरा फ़िर से मिला दे

उम्र फ़िर से २० दे दे

टूट चूका था जो उसे फ़िर से जुड़ा दे।


क़ैद लगा दी सय्याद ने आना नहीं कू-ए-यार में, 

आरज़ू मेरी अज़ान है क़फ़स कहाँ मेरी हसरत थी  

तेरे इलज़ाम में भी तल्ख़ हक़ीक़त थी 

पर हमारी मोहब्बत कहाँ वालिद के जैसी थी  

या रब मुझ पर भी करम कर दे

मिल्लत के लिए हुआ बर्बाद मुझे आबाद कर दे

 

या अल्लाह क्यों आये थे वोह मेरी ज़िन्दगी में

क्यों उनकी मोहब्बत डाली थी तूने दिल में

जब मोहब्बत डाली थी तो

क्यों फ़िराक़ आया मेरी क़िस्मत में

जब वस्ल था मुमकिन तो

क्यों निकाल दी उनकी मोहब्बत दिल से

 

या अल्लाह उन पर फ़िदा हुए तेरी मर्ज़ी से हम

मिला साथ उनका उसका रहेगा ग़म

अब तू भी क्यों कर किसी को किसी पर फ़िदा करे

जो भुगत रहा हूँ में,

दुआ है मोहब्बत करने वालों को

तू क़यामत तक ना जुदा करे

बोहोत तन्हा हो गया हूँ तेरे जाने के बाद

ख़ुश हुआ दुश्मन हमारी जुदाई के बाद

यही तो है फ़ितरत शैतान की

ख़ुश होता है दो दिलों को जुदा करने के बाद


कब तक में पराये कन्धों का बनूँ सहारा

परवाज़ मेरी इतनी बुलंद कर ख़ुदारा

जहाँ चाहूँ पहुँचूँ दोबारा

 

में चेहरे पड़ता रहा दूसरों की तकलीफ़ का

ख़ुद का चेहरा न पड़ पाया

बदल न सका लिखा अपने नसीब का

जो आईना दिखा ना सका तक़दीर में लिखा मेरे नसीब का

चेहरे पर अक्स साफ़ नज़र आ गया  मेरी तकलीफ़ का

 

 सहाफ़ी ज़ुबेर 

ہر بچہ کرے گا سوال، کیوں نہ کرے بغاوت؟

 عربوں کو بھیجی گئی چوڑیاں ہوں انہیں مبارک ملت کے ساتھ جنگ میں جو ہوئے نادارِد یہود و نصاریٰ کے آگے سجدہ ریز ہو گئے رہبر افضل ہوتا تم ہو جات...