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29/12/2024

ज़ालिम के एक तरफ़ा अमल

खोद के अपने वतन को तलाश रहे थे बुतख़ाना

मस्जिद  गई गले में अब बनाओगे क्या बहाना

 

नमाज़ बंद करवा रहे थे मस्जिद निकल गई ज़मीन से

वही मेहराब वही ज़ीना देखे है ज़माना

 

सभी दबंग हो गए भाईजान का बेख़ौफ़ अंदाज़ देख कर

गूँगे भी बोल उठे तुझको बोलते देख कर

पहले तनहा धो देता था ज़ालिमों के बेहूदा सवाल पर

अब इज्तेमाई धुलाई हो रही है नाइन्साफ़ी की बात पर

 

जो कभी रहते थे ख़ौफ़ ज़दा लेने से नाम मुसलमान

तीखे सवालों से अब सीना शिगाफ़ कर रहे

नइन्साफ़ हाकिम का हर बात पर

 

हसीना की ज़ुल्फ़ों पर कब तक करता कलाम

कुछ हासिल नहीं होता मोहब्बत में एक तरफ़ा पयाम

ज़ालिम के ज़हर ने कर दिया ज़हरीला अकसरियत अवाम

वतन से मोहब्बत के नाम पर बना दिया हमको ग़ुलाम

 

वजूद कमज़ोर कर दिया खोद कर वतन की बुनयाद

अमन तलाश रहा है ज़ालिम कर के हिन्द बर्बाद

इसका असर आज नहीं दिखेगा बरसों बाद

 

तहज़ीब के नाम पर बस बाक़ी रहा ज़हरीला मवाद

दो आब हुए ज़हरीले हर जानिब बैठे हैं ज़हरीले

 किस से करूँ मोहब्बत की बात

 

ज़ालिम के एक तरफ़ा अमल नाइन्साफ़ी ने

किया माहौल ख़राब

ज़ुल्म हमने सहा शहादत भी हुई हमारी

नस्लें भी हुई हमारी ही गिरफ़्तार

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

28/12/2024

आज के दिन तू दुनियाँ में आई थी

 अंधकार से उजाले में लाई थी

आज के दिन तू दुनियाँ में आई थी

ख़ौफ़ में था हर ज़ालिम, नाइन्साफ़

जब तूने क़लम हाथ में उठाई थी


दोस्त बन कर आई थी, दिल में तू समाई थी 

आज के दिन आ कर मिल ज़रा, हो मुबारक तुझे सालगिरह 


बार बार यह दिन तेरी ज़िन्दगी में लौट कर आये 

ख़ुशियाँ तेरे दर से कभी रूठ कर ना जाएँ

 

वोह दौर हो गया पुराना, जब देती दुनियाँ क़ानून की दुहाई थी 

जब तूने क़ानून को पढ़ा समझा

हर अवाम का हक़ इन्साफ़ है, यह बात तुझे समझ आई थी

 

लुक़नत पसंदों में एक अजीब सी ख़ामोशी छाई थी 

हर ज़ुल्म पर उनकी क़िस्मत की दुहाई थी

तूने समझाया उनको हक़ अपना तब

उनकी ज़ुबान में हक़गोई आई थी

 

आईन में दर्ज है अवाम के हर तबक़े का हक़

ग़ुलामना सोच सुनाते रहे हाकिम की शान में रूबाही

ज़ाफ़रानी सहाफ़त में जब सच बोलने की कमी आई थी

तब तूने ज़ाफ़रानी दहशत और ज़ुल्म की बात अवाम को बताई थी

 

सहाफ़त तो बेच चुकी थी अपना किरदार

उनकी चौक चौराहे पर बिकती है इज़्ज़त खुले बाज़ार

तब तूने इल्म की शमा जलाई थी 

तारीकी से रौशनी की जानिब तू उम्मा को लाई थी 


तेरी दुआ मुझे लग गई ना वोह बैचेनी रही

ना अब कोई तेरी फ़िक्र रही

दिल पर एक बेख़ुदी सी छाई रही के तू अब रक़ीब की हो गई 



सहाफ़ी ज़ुबेर 

25/12/2024

जब ज़ुल्म ज़ालिम का हद से बढ़ गया

है हुकुम हर ख़ास आम बना ले

अपनी तन्हाई ज़िक्र इलाही से बेहतर

क़ैस के ऊपर कोई क़ैद नहींकहीं भी रहे

लैला की याद दिल में बसा कर

 

हम भी तनहा हो गए माशूक़ की याद दिल में बसा कर

तन्हाई में भी पाते है तवानाई उनका नाम ले कर

 

हर दम रहता है भरम उसके दीदार का

कहीं से वोह जाएँ पूछ लें हाल दिल बेक़रार का

 

जब ज़ुल्म ज़ालिम का हद से बढ़ गया

हर वोह बच्चा भी जंग में निकल गया

जिसको कभी आती नहीं थी अय्यारी

 

जंग की इस आतिश ने दुश्मन का हर क़िला तबाह कर दिया

हमारे ऊपर वही वहशत वही तन्हाई रही बाक़ी

 

पाक क़ुव्वत देख परेशान है नापाक क्यों कर

जंग में जब होंगे रू बरू असलाह डाल देगा ज़ालिम

माशूक़ के रुख़सार का नूर देख कर


९३ का ख़ूब बनाया लतीफ़ा एहल ए कुफ्र ने ७१ में 

तुम्हारे ऊपर अब हुकूमत पाक होगी तुम्हारी ग़फ़लत में 

 

फ़िर सजेंगी मेहफ़िलें दयार ए यार में

हर अवाम शामिल रहा जश्न शब आज़ादी में

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

19/12/2024

जो ज़ाहिर हुआ वोह मेरा उरूज था

 पैमाना तेरे इश्क़ का झलक ही गया

हमने भी तेरी मोहब्बत में कुछ छुपा लिया

कुछ ज़ाहिर कर दिया


जो ज़ाहिर हुआ वोह मेरा उरूज था

जो छुपा लिया वोह तेरा इश्क़ था 


अपनी तनहाई को ख़ुदा के ज़िक्र से सजा ले

शैतान के शर से बचा रहेगा


फ़िक्र ए मिल्लत में जाग दी कई रातें

तेरे अलफ़ाज़ से जब इंक़लाब आया

अवाम नादिम हुआ इतनी तबाही के बाद

कियों उसे होश आया


हिन्दू राष्ट्र बनाने के जूनून में, जो था वोह भी गवा बैठे 

पाकिस्तान तो बन गया हिंदुस्तान बर्बाद कर बैठे 


हमारे ऊपर तो फ़क़त यार की मोहब्बत का जूनून रहा हावी 

वोह सब हासिल किया जो तुम दबा कर थे बैठे 


शुमाल से ही हुआ था बग़ावत का आग़ाज़ 

शुमाल से ही की है तुमने मोईन के ख़िलाफ़ जंग की शुरूवात 


जब जंग हो उसके दोस्त के साथ  कैसे जीतोगे तुम मक्कार 

अनदेखी मख़लूक़ ने पहले भी तुमको ख़ूब सताया  

तुम्हारे फौजी बेड़े को तबाह कर वोह हाथ ना आया

इस बार भी तुम्हारी जंग है उस ही अनदेखे के साथ 


ख़ूब लगा दो बुत-कदा हर मस्जिद हर मज़ार 

क़ुव्वत कौन देगा तुमको उठाने हाथ में तलवार  

इतना ग़ुरूर है अगर तो उड़ा दो फ़िज़ा में अपने जंगी जहाज़ 

उड़ते ही गिरेगें बीच बाज़ार 


मयकदे में तलाशो या तलाशो बूत कदे में  

ख़ुदा मिलेगा बस उस ही दरवेश के दरबार


मेरा मयकदा है बस माशूक़ का प्यार,  

वोह मोहनी सूरत वोह कजरारे नयन 

कभी ज़ुल्फ़ें गिराती कभी दिलकश अदाएं लूट लेती मोरा चैन


 सहाफ़ी ज़ुबेर

16/12/2024

ज़ुल्म जब ज़ालिम का हद से बड़ जाये

 फ़िराक़ ए यार में हाल यह हो गया

उदास है दिल मेरा तेरी जुदाई में पर

कैफ़ियत पर उसका कोई एहसास ना रहा


ज़ुल्म जब ज़ालिम का हद से बड़ जाये

हर मज़लूम के हाथ में फिर असलाह आ जाये 

अदलिया जब फ़िरक़ापरस्त हो जाये, 

तब मज़लूम फ़ैसला ख़ुद कर जाये 


कश्मीर हो या मणिपुर फिर ज़ालिम ना इंसाफ़

हाकिम हर मज़लूम में एक सी सिफ़त पाये 


शुमाल में ज़ाफ़रानी उधम ढाये, जल्द है की 

ज़ालिम अपने किये ज़ुल्म पर पछताए 

 

अनक़रीब है की कोई गिरोय ऐसा उठ जाये 

जो ज़ालिम को तबाह कर जाये 


शाहकाल इक़तेदार के नशे में शान से 

ज़ुल्म पर ज़ुल्म करता गया, 

कब अदना से ३ ने जज़ीरा तबाह कर दिया 

उसे पता भी नहीं पड़ पाये 

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

15/12/2024

राम मंदिर और ताज महल

अज़ीज़ नाज़रीन ज़ाफ़रानी दरिंदा नाइन्साफ़ ख़ूनी दहशतगर्द ने राम मंदिर का मुवाज़ना ताज महल से किया है।  हाथ काटने के झूठ फ़रेब पर मुनाफ़िक़, इस्लाम, मुस्लिम पाकिस्तान दुश्मन  शाहनवाज़  को तारीख़ के सफ़ों से सबूत दिखा कर धो चूका हूँ, जहाँ कहीं भी हाथ काटने का कोई ज़िक्र नहीं है।  बाबर और राम का मुवाज़ना करने के बाद अब ज़ाफ़रानी ज़ालिम दरिंदे जाहिल को मंदिर और महल में फ़र्क़ समझाना ज़रूरी है।  जिसको नज़्म  के अंदाज़ में जूते मारूंगा।  जिस गटर नुमा ज़हरीले माहौल में यह कीड़ा पैदा हुआ है वैसी ही इसकी सिफ़त है सिर्फ़ और सिर्फ़ झूठ नाइंसाफी की बुनियाद पर ज़हर फैलाना। 

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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ताज महल बनने से आलम में भारत का नाम हुआ

राम मंदिर बनने से भारत कुफ़्र और दहशत में बदनाम हुआ

 

राम मंदिर फ़रेब, झूठ डाकाज़नी का मर्कज़ हुआ

ताज जदीद दुनियाँ का अजूबा हुआ


राम मंदिर शिद्दत पसंदों दहशत को वक़्फ़ हुआ 

ताज महल पूरे आलम के अवाम के लिए खुला हुआ 


राम मंदिर सुप्रीम दहशत की बुनयाद पर तामीर हुआ

ताज महल हक़ हलाल की बुनियाद पर टीयूरिस्टों का मर्कज़ बना  


राम मंदिर की तामीर से क़ब्ल लाखों मुस्लिम अवाम का क़त्ल हुआ 

ताज महल की तामीर के बाद हाथ काटे 

यह ज़ाफ़रानी फ़रेब खूब आम हुआ 


मंदिर के लिए मुस्लिम क़त्ल ए आम तारीख़ में दर्ज हुआ 

हाथ काटे इस ज़ाफ़रानी फ़रेब झूट का पर्दा फाश हुआ 


ताज से ताजनगर में रोज़गार हर तबक़े को मिला 

राम मंदिर की तामीर से मुफ़लिस, मुस्लिम दलित बेघर हुआ 


सिर्फ़ आला ज़ात धन्ना सेठ अम्बानी अडानी बच्चन 

को मंदिर से माशी फ़रोग़ मिला

मुस्लिम दलितों का जो था रोज़गार वोह भी छीन लिया


बनारस अब एक ही ज़ात एक ही रंग का हुआ 

ताज नगर अभी भी हज़ार रंगों से भरा हुआ 


ताज महल में जा सकता है हर ख़ास आम 

ज़ाफ़रानी ज़हर साजिशी दहशत से भरा हुआ 

राम मंदिर हर अवाम का जाना वर्जित हुआ 


ताज महल देता है मोहब्बत का पैग़ाम

हर मोहब्बत करने वाला ताज का शैदाई हुआ 

राम मंदिर देता नफ़रत का पैग़ाम, 

....हर मंदिर जाने वाला कहता जय जय श्री

मंदिर जाने वाला हुआ दहशत का ग़ुलाम


सहाफ़ी ज़ुबेर

ہر بچہ کرے گا سوال، کیوں نہ کرے بغاوت؟

 عربوں کو بھیجی گئی چوڑیاں ہوں انہیں مبارک ملت کے ساتھ جنگ میں جو ہوئے نادارِد یہود و نصاریٰ کے آگے سجدہ ریز ہو گئے رہبر افضل ہوتا تم ہو جات...