दोनों आलम में धूम मची,
फरिश्तों की ले कर उसको फौज चली
रिक़्क़त ऐसी क्यों छाई है एहले ख़ाना पर,
खुश होंगे इनामों की देख कर झड़ी
फ़रिश्ते
बदहवास से देखते रह गए
यह
किस की रूह है एहले दुनिया से तुम ले कर आये
दोनों
आलम महक उठा ख़ुश्बू ऐ आमाल से
जन्नत ने बाब ऐ रेहमत खोल दिए उसकी आमद पे
ख़ुदा
ने पूछा फरिश्तों से यह किस रूह को लाये
जवाब दिया तेरी हम्दो सना करने वाले सालेह को लाये
अब्र-ए-रहमत हैं तेरे पोशीदा आमाल
अश्कबार कियों हैं फिर तेरे एहले ख़ाना
हूरें हैं बेताब करने दीदार उसका
मेरा यार चला गया समझा कर
ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा
सहाफ़ी ज़ुबेर