तेरे कजरारे नैनो ने जब मचाया था ग़दर
हुई तुझसे मोहब्बत तेरी और खींचे इस क़दर
पूरी ना हुई दिल की आरज़ू
जब आये तेरी आँखों में भी आंसू
टूट गए हम क़िस्मत का देख क़ेहर
तुम अश्कबार ना होना, दुआगो हूँ ना आये तेरी आँख में आसूं
नफरत है हमें जो देखे किसी आँख में आँसू
देखे ना जातें हैं किसी ख़ातून के आँख में आँसू
चाहे हो वोह पराई, तोड़ डालतें हैं
मुझे किसी ख़ातून के आँख के आँसू
ऐ दोस्त तसव्वुर कर क्या होगा
मेरे दर्द का पैमाना
जब तू रहे दर्द से बेहाल
जो में देखूं मेरे किसी अज़ीज़ के आँख में आँसू
हमें लगते हैं पुरकशिश ख़ुश-ओ-ख़ुर्रम चेहरे
हमें पसंद हैं हशताते बशताते चेहरे
मायूसी कुफ्र है ऐ मुसलमान
आज़माइश पर जो करते सब्र, हैं मुतमईन
वहीँ होतें हैं असली चेहरे।
सहाफ़ी ज़ुबेर