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15/11/2021

तेरा हिज्र और तुझसे वस्ल की चाहत.

सूरत है तेरी के मिटाई जाती ही नहीं

यादें हैं तेरी की भुलाई जाती ही नहीं

सीरत जो तेरी मेरे जज़बात से ज़म हो गयी 

इस दिल से हटाई जाती ही नहीं।  

मेरे जज़बात में पाक, मेरी सोच में पाक

जंग भी है मेरी पाक,

तू भी पाक, में भी पाक, जब मिले दो पाक

नतीजा निकलेगा पाक

 

हमारे चाहने वालों का हम पर कुछ हक़ है,

यह सच है उन सब से ज़्यादा तेरा भी मुझ पर हक़ है।

आप तो मासूम हो गए, हमें आशिक़ कर गए।

हमको मालूम हैं हमारी आँखों का भी

हम पर कुछ हक़ है, मजबूर हैं हम क्या करें

तेरी सूरत के सिवाये कोई नज़र आता ही नहीं  

जब से हम तेरे दीवाने हो गए।



तेरा आशिक़ हूँ तू भी मेरी मोहब्बत में मेरे रंग हो जा

अगर मोहब्बत है तो एक रंग हो और मोम हो जा  

या तो संग दिल हो जा  



रात की तारीकी ने तुम्हे काफिर क़रार किया

एक रात की इबादत ने मुझे ज़ाहिद बना दिया

तेरे वस्ल की चाहत ने मुझे आशिक़ बना दिया।


 

तेरे हर सवालों का जवाब है मेरा सनम,

एक पैमाने में दो शक्ल है मेरा सनम, 

नारी भी और नूर भी है मेरा सनम, 

फरिश्ता क्या शबी बताएगा उन मर्द की

में हर शबी से अनजान हूँ, जब सामने होगा मेरा सनम. 



जितने ज़ख्म मिले तेरी मोहब्बत में सनम 

उतनी परवाज़ हम पातें हैं 

माशूक़ ने कहा उठ, तो हम उठ जातें हैं 

सो जा तो दुल्हन के जैसे सो जातें हैं.

 

सहाफी जुबेर 

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