फ़रिश्ते को भी दरख़्त से होने लगी मोहब्बत
फ़रिश्ते को भी मीठा मीठा दर्द देने लगी मोहब्बत
वादा कर के ना निभाना दलील है
फ़रिश्ते को वफ़ा सिखाने लगी मोहब्बत।
तेरी ZUBAN ने जिसका इक़रार किया नहीं अभी तक
तेरी आँखें और अमल इक़रार करने लगी मोहब्बत
हर चंद तेरे ख़यालों में रहता है वही
फिर क्यों उस नाम को लिख कर मिटाने लगी
मोहब्बत।
यह मोहब्बत का ही है सुरूर
बेतकल्लुफ़ी में आप से तुम और तू पर आ गए ZARUR
यह है हमको यक़ीन फ़रिश्ता भी
हमारी मोहब्बत में होगा असीर ज़रूर।
मुफ़लिस दिल समझ कर जहाँ ने जिसे ठुकरा दिया
तेरी मोहब्बत ने हमें अरबों की फेहरिस्त में ला खड़ा किया।
दिल ही तो है, कभी था ग़ुरबत का मारा
तेरी मोहब्बत ने मुझे अनमोल बना दिया।
फ़रिश्ते से मोहब्बत का है बन गया फ़साना
तुझे अपना हर ख़्वाब अब सच्चा कर दिखाना
तू रहे हमारी दुवाओं में हर दम शामिल,
में रहूँ साथ तेरे या रहूँ तुझसे जुदा
तुझे अपना मुस्तक़बिल ख़ुद है बनाना।
तू ही मेरे दावें बाज़ू (सीधे हाथ) का फ़रिश्ता
तू ही दिखाए मुझे रास्ता हक़ का
या रब क़ायम रहे मेरे फ़रिश्ते से रिश्ता मोहब्बत का
वोह जो भी लिखे ज़िन्दगी की किताब में
दर्ज करे फरिश्ता सीधे हाथ के हिसाब में।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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