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28/01/2022

फ़रिश्ता और मोहब्बत

फ़रिश्ते को भी दरख़्त से होने लगी मोहब्बत

फ़रिश्ते को भी मीठा मीठा दर्द देने लगी मोहब्बत

वादा कर के ना निभाना दलील है

फ़रिश्ते को वफ़ा सिखाने लगी मोहब्बत। 

 तेरी ZUBAN ने जिसका इक़रार किया नहीं अभी तक

तेरी आँखें और अमल इक़रार करने लगी मोहब्बत


हर चंद तेरे ख़यालों में रहता है वही

फिर क्यों उस नाम को लिख कर मिटाने लगी

मोहब्बत। 

यह मोहब्बत का ही है सुरूर

बेतकल्लुफ़ी में आप से तुम और तू पर आ गए ZARUR 

यह है हमको यक़ीन फ़रिश्ता भी

हमारी मोहब्बत में होगा असीर ज़रूर


मुफ़लिस दिल समझ कर जहाँ ने जिसे ठुकरा दिया 

तेरी मोहब्बत ने हमें अरबों की फेहरिस्त में ला खड़ा किया। 

दिल ही तो है, कभी था ग़ुरबत का मारा 

तेरी मोहब्बत ने मुझे अनमोल बना दिया।    


फ़रिश्ते से मोहब्बत का है बन गया फ़साना  

तुझे अपना हर ख़्वाब अब सच्चा कर दिखाना 

तू रहे हमारी दुवाओं में हर दम शामिल,

में रहूँ साथ तेरे या रहूँ तुझसे जुदा

तुझे अपना मुस्तक़बिल ख़ुद है बनाना।     


तू ही मेरे दावें बाज़ू (सीधे हाथ) का फ़रिश्ता 

तू ही दिखाए मुझे रास्ता हक़ का

या रब क़ायम रहे मेरे फ़रिश्ते से रिश्ता मोहब्बत का  

वोह जो भी लिखे ज़िन्दगी की किताब में 

दर्ज करे फरिश्ता सीधे हाथ के हिसाब में। 

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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