तेरी दुआ कुछ काम ना आई, मेरी दुआ कुछ काम ना आई
मोहब्बत में २० साल
की जवानी हमने ना पाई।
बेसाख़्ता दिल की आरज़ू
ज़ाहिर कर गए हम तुमसे
अफ़सोस हमारे नसीब में तेरी मोहब्बत ना आई।
मेरी
हर सांस पर तेरा नाम है,
तू
नहीं बेईमान यह मेरा ईमान है।
कुछ
तो तेरी भी रही होगी मजबूरी
वगर
ना आ कर जाना तुझे भी
करता कियों परेशान है।
तेरी दुआ हमारे लिए
बददुआ बन गई,
तुझसे जुदा हुए हम ऐसे
की अब तो
ज़िन्दगी तल्ख़ और अज़ाब
बन गई
हर सांस एक आह हर गिर्या
एक सिसकी बन गई।
ख़ुदा
से दुआ थी ना आये कभी दूरी,
तू
पास रहे चाहे हो कैसी भी मजबूरी
मेरी
ख़्वाहिशें थी बेहिसाब
रियाज़ी
में जमा और तफ़रीक़ का
ना रख सका ज़ुबेर
हालात ऐसे हुए की छोड़ दिया तूने भी साथ।
हमारी
आँखों के
सामने तेरी
डोली उठ
गई,
हमारी
तो दुनियां
ही जैसे
उजड़ गई,
सुर्ख़
जोड़े में
तू सज
गई,
एक
आस थी
वस्ल की
तुझसे
वोह
भी अब
तो टूट
गई।
हिज्र
की ऐसी
मनहूसियत छाई,
एक
ही हल्क़े
में थे
पर थी
जुदाई
तेरी
तन्हाई में
भी थी
मिलन की
एक आस
एक
तू ही
थी दिल
में हमारे
अब
तो तू
भी हुई
पराई।
तेरी जुदाई से पत्थर हुए हम,
मायूसी ऐसी छाई की खामोश हुए हम
तेरी परछाई को मुस्तक़बिल जान कर
उसके पीछे पीछे भागने लगे हम
तुझे देख कर खुश होने वाला इंसान हूँ
छुप छुप कर नहीं तुझे पूरी आँखों से
देखने को तैयार हूँ।
तुझको
भूलना तो बहोत चाहा
पर
ख़्वाहिशों ने मचाया उधम,
दिल
ने कर दी बग़ावत
हर बार मजबूर हुए तुम और हम।
सहाफ़ी ज़ुबेर
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