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12/05/2023

मज़बूत हुआ तू क़ैद से आज़ाद

तेरा इश्क़ मर्ज़ है या मरहम 

दीदार तेरा दर्द है या दवा

तेरा दस्त बन गया है हर मर्ज़ की शिफ़ा


मज़बूत हुआ तू क़ैद से आज़ाद

बड़ा ही मुश्किल था जब हावी था शैतान

हुई मुवाफ़िक़ सबा जब तेरे साथ हुआ रेहमान

 

हर दम लानत का मुर्तकिब हुआ तू

तेरी हर बदफैली पर ज़लील और रूसवा हुआ तू

साजिश रच कर बदनाम हुआ तू


४० लंगूर ने ख़ूब मचाया था उधम 

रावण सेना के ऊपर फिर भारी पड़े हम 

पाक इल्म ने फिर कर दिया तुझे कम 


वास्ता मुहम्मद आले मुहम्मद का तुझे दे बैठे हम  

माशूक़ के ग़म का वास्ता तुझे दे बैठे हम

मेरा हर ग़म कमतर है जब सामने हो उनका ग़म  

जब मक़बूल हुई एक हाजत सरी मुकम्मल होंगीं ताहम

 

तेरी क़ुव्वत से हो गया नए दौर का आग़ाज़

फ़िक़रे कसने वाले दुश्मनों के मुँह पर होगा क़ुफ़्ल 

मसनद नशीन होगा तू ख़ुद्दार जदीद करेगा पाक 

फ़ौज भी होगी तुझसे अदना, 

अदलिया होगी ख़ुदमुख़्तार पाक साफ़


दुश्मनों के चेहरे लटक कर घुटनों तक आ गए 

लंगूर लँगूरनियाँ जो मसरूफ़ थे मखौल में कल तक 

बद-हवास देखते रह गए हाय यह क्या हो गया हम कहाँ आ गए। 


सहाफ़ी ज़ुबेर

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