अभी भी बोहोत याद आती है वोह
भूले नहीं भूलाये जाती है वोह
तेरी यादों के सहारे अभी तक ज़िंदा हैं
कियोंके तेरी याद जो दिल से निकल कर जाती ही नहीं
दोस्तों ने ही किया
है दुश्मनों वाला काम
तुझे जुदा करने को भेजे
झूठे पैग़ाम
पर मुझे किसी से कोई
गिला नहीं
ख़ुश हूँ में इससे जुड़ा था कभी तुजसे मेरा नाम
हमें है क़ुबूल मोहब्बत में मिला है जो फ़िराक़
रही आरज़ू की बोले तीन अलफ़ाज़ क़ुबूल क़ुबूल क़ुबूल
जब जब याद आती है वोह वही अलफ़ाज़ बन जातें हैं शूल
नफ़रत हुई ज़नाना ज़ात से,
भड़क जाते हैं अब मोहब्बत की बात पे
तेरी बेवफ़ाई ने नाहक़ तोहमत लगाई मोहब्बत पे
तू सदा ख़ुश रहे यही हैं जज़बात दुआ है आज भी हमारी जानिब से
सहाफ़ी ज़ुबेर
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