मेरा फ़रिश्ता, मेरी परी, तू है मेरा सर
कर लो दिल की बात दुनियां रहे बेख़बर।
नूर नूर नूर हूर ज़हूर, तेरा हुस्न देख कर
क्या करू में गुफ्तगू।
सुबह की शबनम का एक क़तरा भी,
बेहेर अक़ियानूस से है बढ़ कर.
तेरी दुआ में है वोह असर,
में रहूँ सर तेरा, तू बने मेरा सर
पहले, दुसरे नाम का हो गया चर्चा,
तीसरा नाम अब है तेरा सर,
ख़ुदग़र्ज़ बन कहता है सर से जुबेर
दुआ करो मिले मोहब्बत में मंज़िल
जल्द मिलें दो सर से सर.
यह सर रहेगा सदा तेरी ग़ुलामी में हाज़िर,
उन लभों को चूम लूँ , जिनसे निकले हर बात पर वोह शीरीं अलफ़ाज़, ....... सर
तेरे हाथों को दू बोसा जिनसे छु ली तूने मेरी किताब, सर।
मेरी तन्हाइयों ने जब घेरा था मुझे,
और ना पुकारा किसी ने सर,
हम अश्क़ लिए आखों से ख़ुद ही बोल बैठे। .... सर
इस सर को झुका दूँ तेरी चौखट पर,
गर चाहे छोटा हो या बड़ा तेरा घर,
बुतख़ाना जान कर सजदा कर दू
क्योंकी तू खुद मौजूद है उस घर पर.
सहाफ़ी जुबेर
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