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25/11/2022

एक ग़ज़ल तेरे नाम

तेरे कजरारे नैनों ने हमें तेरा आशिक़ बना दिया

तेरी जुदाई ने हमें मजनू बना दिया

तुम ज़िन्दगी के उस दौर में मिले हमें  

तेरी जुदाई के ख़ौफ़ ने हमें नमाज़ी बना दिया।


उसने मुझे तब छोड़ा जब

उसकी आदत हो गई थी

उसके दीदार को तरस गए हम 

जब उसकी तलब हो गई थी

  

उसको याद कर अश्क़ बहाने की आदत छोड़

तन्हां रहने की अदा सिख ली हमने

तेरे इंतज़ार के उन पलों को याद कर जी लेंगें हम

अब उम्मीद नहीं तेरे वापिस आने की।

मेरी ग़ज़ल को जिन्होंने हव्वा समझ रखा है

मेरे दर्द को देख जिन्होंने तंज़ किया है

में क्या ग़ज़ल सुनाऊँ उनको

जिन्होंने मेरे एहसासात को क़दमों तले रौँद दिया है  

 

मेरे सुबह शाम तेरे नाम लिख दूँ

इस ग़ज़ल की सच्चाई बयान कर दूँ  

मेरी मोहब्बत को सब पर आश्कार कर दूँ 

मेरे कलाम की हक़ीक़त है तू

तेरे नाम पर ज़िन्दगी लिख दूँ। 

 

एक क़फ़स है तेरे बग़ैर मेरी ज़िन्दगी की हक़ीक़त

आये शा म  तू जुदा हुई जब से

तल्ख़ हुए अलफ़ाज़ और साख़ार हुई ज़ुबान


तेरे नाम ने हमें मशहूर कर दिया

गुलाब को इश्क़े नाज़ में हमने गुल कर दिया

ज़माने के अलफ़ाज़ में गुल्लू कर दिया 


।।  सहाफ़ी ज़ुबेर  ।।

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