तेरी खुली ज़ुल्फ़ों के दो ही दावेदार
एक मेरी मोहब्बत ते
दूजा तेरा इक़रार
तेरे क़ुबूलनामे को समझने
से रहा क़ासिर
दिन और तारीख़ ने जिसमे
निभाया नुमाया किरदार
फिर वही ११ का अदद हमारी
ज़िन्दगी में लौट कर आया
फिर बिखरी वही तेरी ११ की बहार
तारीख़ के उस दिन को जमा कर देखा तो आया अदद ११
ज़हरीली दूकान खोल दी तूने मोहब्बत के नाम पर
वतन की मोहब्बत हमें ना कभी थी ना रहेगी हिन्द के नाम पर
नफ़सियाती खऱाबी पैदा हुई एक नाज़ुक ज़ेहन पर
ज़प्त कितना करे मासूम हर एक थप्पड़ के जवाब पर
थप्पड़ गाल पर पड़ा है नक़्श ज़हन और दिल पर रखना
इसका क़िसास तुझ पर है लाज़िम उमर भर चाहे जद्दो जेहद पड़े करना
हो गई हमसे ग़फ़लत जो कर दी क़ियादत के ख़िलाफ़ बात
ले लिए अलफ़ाज़ वापिस ना करो हिन्द से मोहब्बत वाली बात
मिल्लत का दर्द और हमदर्दी है तुम्हारे अंदर तक़सीम की भी कर लो बात
पाक मोहब्बत हमारे दिल में हिन्द में नहीं वोह बात
हर शख़्स हमारी मोहब्बत जो करे तक़सीम वाली बात
सहाफ़ी ज़ुबेर
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