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26/08/2023

तेरी खुली ज़ुल्फ़ों के दो ही दावेदार

 तेरी खुली ज़ुल्फ़ों के दो ही दावेदार

एक मेरी मोहब्बत ते दूजा तेरा इक़रार

 

तेरे क़ुबूलनामे को समझने से रहा क़ासिर

दिन और तारीख़ ने जिसमे निभाया नुमाया किरदार

 

फिर वही ११ का अदद हमारी ज़िन्दगी में लौट कर आया

फिर बिखरी वही तेरी ११ की बहार 

तारीख़ के उस दिन को जमा कर देखा तो आया अदद ११


ज़हरीली दूकान खोल दी तूने मोहब्बत के नाम पर 

वतन की मोहब्बत हमें ना कभी थी ना रहेगी हिन्द के नाम पर 

नफ़सियाती खऱाबी पैदा हुई एक नाज़ुक ज़ेहन पर

ज़प्त कितना करे मासूम हर एक थप्पड़ के जवाब पर  


थप्पड़ गाल पर पड़ा है नक़्श ज़हन और दिल पर रखना 

इसका क़िसास तुझ पर है लाज़िम उमर भर चाहे जद्दो जेहद पड़े करना 


हो गई हमसे ग़फ़लत जो कर दी क़ियादत के ख़िलाफ़ बात 

ले लिए अलफ़ाज़ वापिस ना करो हिन्द से मोहब्बत वाली बात 

मिल्लत का दर्द और हमदर्दी है तुम्हारे अंदर तक़सीम की भी कर लो बात 

पाक मोहब्बत हमारे दिल में हिन्द में नहीं वोह बात 

हर शख़्स हमारी मोहब्बत जो करे तक़सीम वाली बात 


सहाफ़ी ज़ुबेर 

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