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22/12/2023

रह रह कर तेरा ख़याल आता है

आज उनके हुजरे में एक फ़रिश्ता देखा 

सिफ़त में उसको पतिंगे जैसा देखा 

ख़ुदा की रेहमत का उसको अलम्बरदार देखा 


ए रब हमारे, हमसे वोह इम्तेहान ना लेना जिसको देने की क़ुव्वत ना हो 

गर तेरा इम्तेहान है बोहोत सख़्त तो उसकी मश्क़ की हिदायत देना    

गर उम्मी है मिल्लत तो अज़ीयत सहने की क़ुव्वत भी देना  


अजीब सी आवाज़े सुनाई देती हैं मुझको 

कभी कोयल की कूक कभी बादलों की गरज सुनाई देती है मुझको   

चौंक के जो होता हूँ बैदार कुछ दिखाई ना देता है मुझको 


तेरे इश्क़ का जूनून है या ख़ौफ़ ए ख़ुदाई

लरज़ जाता हूँ बाहों में भरके तुझको 


बड़ी ही देर तक रहा वोह मेरे हमराह 

हाथों में पकड़ कर फ़िज़ाओं में परवाज़ को छोड़ दिया उसको

फ़िर ना जाने कहाँ हो गया ग़ायब दे कर इनाम मुझको


रह रह कर तेरा ख़याल आता है बार बार


इंसाफ़ के इंक़लाब को कहते हो दहशत या वतन से ग़द्दारी

नाइंसाफ़ी वतन में होंगी तो आवाज़ वतन को ही सुन्ना होगी हमारी 


हक़ के मुद्दे पर एक हुए आज मुसलमान 

हुजूम से निकाल क़तल करो जो पाकीज़ा जंग को करते हैं बदनाम 

ना कोई मुनाफ़िक़ रहा ना कोई ग़द्दार अब दरमियान


सज़ा का मुस्तहिक़ है हर वोह मुल्क 

जंग में जो यहूद, नसरानी और कुफ़्र की करे ताईद

चाहे वोह बेहर हो रेन या मुत्तहिदा अरब का साहिल।


 हमारी मस्जिदें जब हड़प की गई इनजस्टिसतान में 

तुम्हे कोई हक़ नहीं बुतख़ाने करो तामीर हमारे वतन में 


सहाफ़ी ज़ुबेर 

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