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08/12/2023

वक़्फ़ हो गई मुस्कराहट तेरे लिए

एक तारा टिमटिमाता हुआ, एक सख़्ती से खड़ा है

दो मुजाहिदों ने जंग लड़ी, दो का नाम बड़ा है

वक़्फ़ हो गई मुस्कराहट तेरे लिए,

हमें तो माशूक़ और उसकी ज़ुल्फ़ों से इश्क़ हो गया है


अब यह लबों के पैमाने खुलेगें तो तेरे लिए 

मेरी ज़ुल्फ़ों की छावों है सिर्फ़ तेरे लिए 

में कभी धूप में कभी छावों में रहूंगी तेरे लिए।


जीत लेगा जो दिल मेरा में उस ही की रहूँगी 

जो करेगा वफ़ा मुझसे में उस ही को दिखूंगी


जीत लिया है दिल मेरा तूने अब में तेरे पास ही रहूंगी,

 नहीं कोई चिलमन की क़ैद अब तो में तुझे हर रोज़ दिखूंगी।


 तेरे इश्क़ में कहाँ कहाँ भटक आये हम

तुझको पाने की चाहत में कभी काबा कभी मदीना चले आये हम


तुझे देखने की आरज़ू हुई इसलिए तुझे बुला लिया मेने 

तेरे दीदार पर ज़माने को भूला दिया मेने 


आँखों से झलक आये जो अश्क उनके भी फ़िराक़ ए यार में 

रब की रेहमत से मायूस ना हैं इतनी अज़ीयत पा कर भी 


उनके बहते अश्कों पर रब अपना जलवा दिखाएगा 

अनहोनी सी जो बात है अहल ए आलम के लिए उनको पूरा कर पायेगा 


सहाफ़ी ज़ुबेर

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