लो पाक महीना रुख़सत हुआ
उसको जाते
देख शैतान खुश हुआ
ज़ंजीरों
में जकड़ा फ़िर क़ैद से बहार आएगा
मोमीनों को फ़िर से बहकायेगा
तरावीह हुई
आज ख़त्म तिलावत ए पाक न करना बंद
मेहफ़ूज़ रहा
जिनके दिलों में पाक कलाम
उनको ही
कहते हैं हाफ़िज़ ए क़ुरान
अपना ईमान करलो पुख़्ता, बाद एक माह की मश्क़ के करते रहो सजदा
मोमीनों
से दूर भाग जाएगा शैतान जब उनमे पायेगा ईमान पुख़्ता
रोज़ेदारों
पर है ख़ुदा का ख़ास इनाम
सब कुछ जाइज़
ख़ूब खाओ शव्वाल के दिन रौज़ा हराम
ईद का दिन
ख़ुदा की जानिब से ख़ुशी का है
ग़म का कोई
तस्सव्वुर ही नहीं
ख़ुदा की
हर नेमत का करो शुक्र अदा
तेरी अज़ामाइश
है फ़लस्तीन, कश्मीर और हिन्द का मुसलमान
ख़ुदा की
हर आज़माइश के बाद मिलता है बेहतरीन इनाम
ख़ुश होने पर जब मोमीन बादशाह जागीर, हीरे जवाहरात
देते हैं इनाम
फ़िर वोह
तो बादशाहों का है बादशाह
ख़ुदा की
आज़माइश में जो हुआ कामयाब मुसलमान
उसके ख़ज़ानों
से क्या क्या मिलेगा नहीं हमें गुमान
यह तो पंसारी
फ़ितरत है कहता ख़ुद को महान
५ किलों
हूकूमती ख़ैरात पर महदूत कर दिया अवाम
गुनाहों
से पाक हुई वोह ख़ातून जो हुई मुसलमान
महज़ ४ रोज़
तक रही इस्लाम में फ़िर पहुंची पाक साफ़ ख़ुदा के पास
जिस जगह
हुई थी दाख़िल ए इस्लाम
उस ही जगह
तामीर होगी मस्जिद जो फ़ौत हुई इस माह रमज़ान
सहाफ़ी ज़ुबेर
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