जिन्ना की बात मानने के लिए एक और गाँधी चाहिए
४७ की बात हुई पुरानी " NEW INDIA " में हमको अपना हिस्सा चाहिए
नहीं यक़ीन तुम्हारे किसी भी इदारे पर हमको हमारा
इदारा चाहिए
बात करें तुमसे इन्साफ़ की क़ियों हमको पाकिस्तान
जाना चाहिए
हाकिम बनाओ हमारे रहबर को नहीं तो हमको एक और बटवारा
चाहिए
नए भारत की जब बात करता फ़िर कियों उसमे शैतानी होनी
चाहिए
नए भारत में हर चीज़ हुई नई हमको भी नई हिस्सेदारी
चाहिए
अवाम से बात करने से कियों तू डरता सहाफ़ी इजलास
कियों नहीं करता
हक़ बोलने वालों से बात कर तेरी बोली बोलने वालों
से कियों बात करता
जवाब दे ऐसे चुभते हुए सवालों का जो जिगर तेरा फाड़
डालें
पिछले १० सालों में तूने क्या किया, ऐसे सवालों से
कियों भागा फ़िरता
पानी का गिलास रख कर दोस्ती क़ायम रहे ऐसी बकवास
कियों करता
जिगर फटेगें अभी और तुम्हारे, भट्टी में जलेगें अभी
और तुम्हारे
बोहोत हुई भगवा ज़ुल्म की आंधी साधू पर तेरा हंटर
कियों नहीं चलता
मुँह से जो हगता ऊल जलूल ऐसों के मुँह पर ताला कियों
नहीं लगता
मार डालेगें मार डालेगें हर संघी क़ानून हाथ में लिए फ़िरता
मेरा रहबर क्या कोई सफ़ेद मुर्गी का चूज़ा है
उस मुर्गी के साथ जेल में हर क़ैदी ख़ूब मौज करता
दहशतगर्दों की ऐसी गीदड़भभकीयों से सिर्फ़ एक काफ़िर
ही डरता
ईमान वाले को क्या डरायेगें यह शैतान जो सिर्फ़ अल्लाह
से डरता
ना झुका है ना झुकेगा एक ईमान वाला किसी ज़ालिम के
आगे
जो सिर्फ़ अल्लाह के सामने झुकता
जिन्ना की बात सभी ज़ाफ़रानी करते पर
उनकी बात मानने वाला गाँधी कियों नहीं मिलता।
यहाँ नहीं चलेगा तुम्हारा क़ानून यह है हमारा इलाक़ा
तुम कहते रहो कुछ भी हम कहेगें " सल्तनत ए नख़लिस्तान "
सहाफ़ी
ज़ुबेर
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