फ़िर से एक बार जमने वाली है महफ़िल ए यार
वही ख़ुशबू वही सुरूर रहे बाक़ी तेरे साथ
गर इश्क़ है माशूक़ से तो इज़हार कर
मैख़ाने में जा इश्क़ की शराब नोश कर
तू एक अकेला तो ख़ुदा नहीं, हैं अभी और आने वाले
हैं अभी और ख़ुदाई का दावा करने वाले।
मेहफ़िले सजेगी अभी और माशूक़ के सनमख़ाने मे
हैं अभी और मेरे रब की गिरीफ़त मे आने वाले
हैं अभी और रूसवा होने वाले।
क्यों ना करे अपनी तक़दीर पर नाज़ पतिंगा
हैं अभी और शमा जलाने वाले, हैं अभी और राह दिखाने वाले
मै क्यूँ तेरी ताज़िम करूँ क्यों यक़ीन करूँ तेरी ख़ुदाई पर
मेरे माशूक़ ने बताया सिर्फ़ उनकी ज़ुल्फ़ों की ताज़िम कर
सिर्फ़ रब पर यक़ीन रख उस ही से फ़रियाद कर
मेरा यक़ीन तुझ पर है बोहोत पुख़्ता
जो हुआ अच्छा हुआ जो हो रहा है अच्छा है
जो होगा अच्छा ही होगा।
होगा यक़ीन तेरी ख़ुदाई पर अंधी अक़ीदत तेरे पैरोकारों को
हमें तो तेरी शैतानी ताक़त का ज़वाल
और देखना है तेरी मौत को
जो डर गया वोह ख़ुदा नहीं जो मर गया वोह रब नहीं
सहाफ़ी ज़ुबेर
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