अभी और आसमानी आग बरसना बाक़ी है
अभी और अंगारे देहकना बाक़ी है
अभी और अंगारों में जलना बाक़ी है
आतिश ए नमरूद जला ना सकी इब्राहीम को
पर आसमानी आतिश में हर ज़ालिम का जलना बाक़ी
आग पहुंच गई अब अहल ए अरब की ज़मीन तक
जो बोला मेरे हक़ में उसको है फ़लाही
जो ख़ामोश रहा उसको जला दी
जो दिख रही है मेरी आशिक़ी जो जल रहा वोह तेरा फ़रेब
जो जल गया वोह तेरा फ़रेब था तेरा ग़ुबार
जो बाक़ी रहा वोह मेरा प्यारा
अभी और बरसेगी आग, अभी और शोले होंगे नमूदार
मज़लूम है तू ग़म ना कर बरसेगी जब आसमान से आग
तो जलेगा जालिमों का मुक़द्दर शफ़्फ़ाफ़ नज़र आएगा उनका किरदार
तेरा वजूद जल कर राख हुआ
अपने वतन से दूर सरज़मींन ए अरब मे भी तू जल कर ख़ाक हुआ
क्यों कोई तेरे ग़म को याद करे क्यों कोई तेरे लिए फर्याद करे
यहाँ सब मुनाफ़िक़ों की जमात वाले
सब ग़द्दारों की हाँ में हाँ मिलाने वाले
सहाफ़ी ज़ुबेर
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