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13/10/2024

आरज़ू मेरी अज़ान है

क़ैद लगा दी सय्याद ने आना नहीं कू--यार में,

आरज़ू मेरी अज़ान है क़फ़स कहाँ मेरी हसरत थी

तेरे इलज़ाम में भी तल्ख़ हक़ीक़त थी

पर हमारी मोहब्बत कहाँ वालिद के जैसी थी

 

बोहोत तन्हा हो गया हूँ तेरे जाने के बाद

ख़ुश हुआ दुश्मन हमारी जुदाई के बाद 

यही तो है फ़ितरत शैतान की

ख़ुश होता है दो दिलों को जुदा करने के बाद


कब तक में पराये कन्धों का बनूँ सहारा

परवाज़ मेरी इतनी बुलंद कर ख़ुदारा

जहाँ चाहूँ पहुँचूँ दोबारा

 

में चेहरे पड़ता रहा दूसरों की तकलीफ़ का

ख़ुद का चेहरा पड़ पाया

बदल सका लिखा अपने नसीब का

जो आईना दिखा ना सका तक़दीर में लिखा मेरे नसीब का

चेहरे पर अक्स साफ़ नज़र गया  मेरी तकलीफ़ का

 

 सहाफ़ी ज़ुबेर

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