या रब मुझे ज़ुबाँ दे दे ऐसी, जो जिरह करे अपनो की
या रब मुझे इल्म दे दे ऐसा जो मजलूमों के लिए जंग लड़े क़ानूनी
ख़ुदा को भूल गए इंसान को ख़ुदा बना लिया हमने
दरवेशों की सोहबत छोड़
बुतों को सजदा कर दिया हमने
हुजूम अदब से खड़ा हो गया सुन कर मेरी अज़ान
ख़ातूनों ने सर ढँक लिया सुन कर नाम अज़ान
हीरे की तलाश में पत्थर कई तराश दिए हमने
संगतराश ने मुजस्समा ऐसा तराशा हर बुत
में अक्स तेरा ही पाया हमने
मयकदे में भी जा कर देखा, बुतखाने में तुझको तलाशा
मस्जिद में तुझको ना पाया काबे में ना देखा
है और कौन सा घर जहाँ तुझको ना तलाशा
नज़र झुका कर जो देखा दिल का काशाना
तुझको वहीं पर पाया हमने
तेरी मोहब्बत में हर मुश्किल सेह गए
अलफ़ाज़ ही तो हैं जो ज़ख्म ऐ रूह कर गए
पत्थर जैसे ख़ामोश जिगर को मोम सा कर गए
सहाफ़ी ज़ुबेर
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