हो गई पराई मेरी गुड़िया
जो कभी मायके का थी सहारा
अपने प्रियतम का ग़ुरूर हो गई मेरी गुड़िया
भय्या के आँखों का थी तारा,
बाबुल-मय्या, चाचा -चाची
नानी की मोहब्बत और दुलार थी
ससुराल में सबकी चहेती हो गई
तेरे जाने से मायका हुआ सूना
तेरे आने से ससुराल हुआ आबाद
बंद गई तक़दीर उसकी अब अपने प्रियतम से
कभी ग़म की परछाई न गुज़रे दूर से भी उस से
या रब शैतान मरदूत को रखना दूर मेरी गुड़िया से
ख़ुशियों से दामन उसका भर दे।
या रब उसकी कोख से दीन ओ दुनियाँ के
आलिम फ़ाज़िल वली सिफ़त नस्ल निकले
मेरी गुड़िया को कोई दुःख ना पहुंचे
उसकी हर तमन्ना हो पूरी उसकी ख़ुशी में सबकी ख़ुशी
सहाफ़ी ज़ुबेर
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