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01/11/2024

हुस्न भी आप हैं इश्क़ भी आप हैं जिस तरफ़ देखिये आप ही आप हैं।

 दुश्मन होगा सफ़ा हस्ती से साफ़

कुफ़्र की हर ज़मीन होगी पाक

बंदूक की गोलियाँ दुश्मन की होगी ख़लास

ज़मीन खुद उगलेगी दुश्मन पर आग

 

बोहोत तनहा हूँ तेरे बग़ैर

अकेला अधूरा महसूस कर रहा हूँ

तेरे बग़ैर। 

ज़िन्दगी की जंग लड़ रहा हूँ तेरे बग़ैर

हर वोह जगह जहाँ तेरी मौजूदगी थी

है खाने दौड़ती

जिस रस्ते पर साथ चले थे कुछ दूर

तनहा चलना होता है दुश्वार तेरे बग़ैर।


बके जा रहा हूँ जुनूँ मे

ना होश रहा ना लुत्फ़ ए ज़िन्दगी

बस बेख़ुदी है ऐसी छाई 

हर जानिब दिखती है तेरी परछाई। 


नफ़रत ज़हर और क़त्ल आम

मचा कर ली हुकूमत, क़लम चला सके नहीं


तेरे अलफ़ाज़ की क़फ़स क़ैद नहीं,

थे मेरी हिफ़ाज़त के लिए 

किसी दुशमन ने पिजरा खोल दिया 

परिंदे को परवाज़ करवाने के लिए


मुझे तुझ से मोहब्बत ऐसी हुई 

परिंदा परवाज़ कर वापिस क़फ़स में आया 

मोहब्बत किसी को क़ैद करने में नहीं 

खुले पिंजरे में पंछी ख़ुद चला आये 

जब सय्याद से मोहब्बत हो जाये

परिंदा क़फ़स में आज़ाद मेहफ़ूज़ हो जाये


चरचा है तेरे हुस्न का पर मै वारी जावां

क़ातिल भी तू मक़तूल भी तू

फ़िर हमें काहे बदनाम करे है ज़माना

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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