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11/01/2025

हर जानिब ख़ामोशी

हर जानिब ख़ामोशी छाई है, हर जानिब है सन्नाटा

हर ज़ालिम की आँख है नम हर ज़ालिम है ख़ौफ़ज़दा


ख़ुश्क था हर कूचा हर रास्ता अहल ए फ़लस्तीन पर तंग किया था पानी

तर किया अपना गला अश्कों से ज़ालिम ने जब हुई हर चीज़ फ़ी नारी


अज़ाब ए इलाही तो ख़तम हुआ नबी सल्लम के तशरीफ़ लाने के बाद

आप दोनों जहाँ के लिए रेहमत बने ख़त्म हुआ अज़ाब

   यह तो अज़ाब की अदना सी झलक थी ख़ाक हुआ अमेरिका

 

आशियाने उनके भी हुए ख़ाक जो ज़ुल्म पर रहे ख़ामोश

अगर हर ज़ुल्म पर ज़ालिम को रोक देते तो न भड़कती यह आग

यह तो रहमत है मोहम्मद की नहीं आता अज़ाब

क़ोम ए लूत नूह या फ़िरौन 

अज़ाब ए इलाही से फ़िर बचेगा कौन


सहाफी ज़ुबेर

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