चोर
डाकू की तरह रातों में घुसना है जिसकी फ़ितरत
मस्जिद
या किसी के घर में घुसने की जाती नहीं उनकी आदत
डाकू
बोल कर अपने साथी को बचाने की लंगूरों की हो गई है सिफ़त
अपने
विश्वास को बचाने को ज़ाफ़रानी सहाफ़त की
शरीफ़
को मुजरिम बनाने की है पूरानी फ़ितरत
कोई
माफ़ी मांग कर बुलबुल पर चढ़ गया
कोई
माफ़ी मांग कर ज़लील हो गया
गले
लग कर क़त्ल करने की है फ़ितरत जिन ग़द्दारों की
दूर
रहो ऐसे चापलूसों से जिनकी फ़ितरत से ग़द्दारी की बू आती
गंगा
जमुनी तहज़ीब की जिस ज़ुबान से करता था बात
उस
ही ज़ुबान से करता है ज़हरीली फ़िर्क़ापरस्ती की बात
सहाफ़ी
ज़ुबेर
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