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14/02/2025

आशिक़ हूँ इश्क़ करना मेरा काम

आशिक़ हूँ इश्क़ करना मेरा काम

रोज़ लेता हूँ नाम तेरा सुबह हो या शाम

 

ज़ालिमों को है हुकुम देखो न मेरी मोहब्बत

को बुरी नज़र से

ख़ाक हो जाओगे माशूक़ के जलाल से

 

मै मोहब्बत करता हूँ तुम करते नफ़रत,

मै इश्क़ को फ़रोग देता हूँ तुम करते सियासत


तुम्हारी सियासत में भी नफ़रत, 

मेरी मोहब्बत वाली सियासत 


१४ हो या हो पच्चीस मोहब्बत है मेरी सच्ची 

 मेरी १४ की मोहब्बत मै हया और ईमान 

पच्चीस वाली मोहब्बत में है बड़ा पैग़ाम

 

खुल्लंम् खुल्ला करूँगा मे तो इज़हार ए मोहब्बत

गर हुई जंग मोहब्बत को पाने की ख़ातिर


या तो बन कर ग़ाज़ी पा लेंगें अपनी मोहब्बत

नहीं तो क़ुबूल है मोहब्बत मे पीना जाम ए शहादत


बोहोत हैं जिनके हाथ मे दे दिया तुमने अपनी दीदी का हाथ

फ़िर क्यों है हमारे साथ ही लव जिहाद वाली बात

 

अभी ज़ालिम ने देखा ही कहाँ है अज़्म गज़नवी और अब्दाली

ख़ुदा भी होता है साथ, करे जो मोहब्बत पाक 

 

मजाज़ की मोहब्बत से जब मै इंतेहा को पहुँचा

हर जानिब हक़ीक़ी रहमान और रहीम ही पाया

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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