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24/08/2025

चिमनी है एक दरीचा

 जब भी देखा तुझे अपने आस पास ही देखा

वही जूनून वही हक़ परस्ती पाक मुहाफ़िज़ में देखा

 

चिमनी है एक दरीचा जिससे झलक के नूर आया

अमनी हुई तेरे इश्क़ मै दीवानी तूने उसका ख़ूब साथ पाया

 

इश्क़ करने वालों को माशूक़ से ख़ौफ़ केसा

जब भी देखा तुझे रहमान और रहीम सा देखा

 

निकल गया उस अज़ीयत से जो तेरी जानिब से आई

क्या में हुआ कामयाब उस आज़माइश में

मेरी हालत बताई

 

हर तकलीफ़ तेरी ही अता कर्दा

हर तकलीफ़ को तुझ तक लौट के जाना

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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