अरबों को भेजी गई चूड़ियाँ हों उन्हें मुबारक
मिल्लत के साथ जंग में जो हुए नदारद
यहूद और नसारा के आगे सजदा रेज़ हो गए रहबर
अफ़ज़ल होता तुम हो जाते ग़ारत
इतना क्या ख़ौफ़ है तुम्हे बातिल से
नहीं यक़ीन तुम्हें ख़ुदा की ताक़त
नहीं याद तुम्हे मासूम बच्चों की शहादत
फरामोश किया जिन्होंने फ़लस्तीन को
देना होगा जवाब महशर में फ़िर होगी उनकी आफ़त
आमाल जब रखें जायेगें तुम्हारे मीज़ान पर
हर बच्चा करेगा सवाल क्यों ना की बग़ावत
ग़ुलाम सोच ग़ुलाम क़लम ग़ुलाम शमशीर
बेहतर होता मर जाते ना होती तुम्हारी फ़ज़ीहत
सहाफ़ी जुबेर
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