कोई ज़िंदा रह कर लानत का बाईस बन गया
कोई शहीद हो कर तेरे ऊपर ग़ालिब हो गया
उनकी मोहब्बत हर अवाम के सर चढ़ कर बोल रही
तुम लोगों के लिए नफ़रत का नया बाब खोल रही
उनको अल्लाह की मार्फ़त हासिल हुई
तेरे लिए ख़ुदा की मार बाक़ी रही
सख्त दिन आ रहे हैं ज़ालिमों के लिए
केरलीफोर्निया भूल गए तो
रहो तैयार नई कुदरती मार के लिए
ज़ालिम की हर शाख़ जाएगी दी तराश
अल्लाह तक पहुंच चुकी है मज़लूम की आह
मेरी दुआओं का मरकज़ हर मोमीन रहा है
बद्दुआ में ज़ालिम नाइंसाफ़ दहशत का मरकज़ रहा है
शहीद हो कर हर मोमीन का मर्तबा बड़ा है
ज़ालिम नाइंसाफ़ जहाँ था वहीँ खड़ा है
रोज़ा ए महशर में हर शहीद इमाम हुसैन के साथ खड़ा है
किसी भी शहीद की शहादत बेकार नहीं
इस जंग में हर शहीद फतहयाब हुआ है
सहफ़ी ज़ुबेर
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