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03/10/2020

हाथरस की १९ साल की बच्ची को समर्पित.

अज़ीज़ नाज़रीन हुकूमते हिन्द के हालाते हाज़रा में जो कुछ भी हो रहा है क्या आपने ऐसे ही राम राज की कल्पना की थी।   हाथरस में १९ साला मासूम की मजमूई अस्मत दरी करने के बाद उसकी ज़ुबान काट डाली रीढ़ की हड्डी तोड़ डाली।  यह किस राम को मानने वाले आ गए जो इंसान पर ज़ुल्म की नई कहानी लिख रहें हैं।  अपनी जिन्सी ख़्वाहिशात के ताबे हो कर तुमने किसी के साथ ज़िना किया, लेकिन उसके साथ ज़ुल्म करने की क्या वजह है।  उसपे भी जब हूकूमती ग़ुलामों पुलिस वालों का दिल नहीं भरा तो बग़ैर परिवार को इत्तिला किये रात की तारीकी और अँधेरे में ख़ामोशी से उस बच्ची को सुपुर्दे नार कर दिया।  उसकी लाश से पुलिस को क्या इतना ख़ौफ़ था, और क्या वोह दहशतगर्द थी जो पोशीदा हिकमत इख़्तेयार कर के पुलिस ने दहशत फैलाई।   किस रामभक्त के इशारे पर यह सब हो रहा है।  जो ऐसा राम राज लाना चाहता है जहाँ अवाम का हर तब्क़ा ख़ौफ़ और दहशत में जिए और मरे।   उस परिवार के दिल पर क्या गुज़री होगी जब उनकी उस बच्ची को अपने धार्मिक हिसाब से क्रियाकर्म भी नहीं करने दिया जिसके साथ जिन्सी दहशत की गई थी।   उसके ऊपर मज़ीद ज़ुल्म जब मुख़्तलिफ़ तंज़ीमों की ख़ातून और बच्चियां पहुंची तो उनके साथ पुलिस ने ज़्याती की उनके कपडे नोचे दामन फाड़ डाला।  शर्म, मर जाओ, अगर यही तुम्हारी नौकरी और हुकूमत के हुकूम की तामील करना है तो इससे बेहतर नौकरी छोड़ दो बजाये हुकूमत के ज़ालिमों, शैतानों और रावणों के हुकूम की अमलबजावणी करने के। 

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ना हिन्दू  मेहफ़ूज़  ना मुस्लिम मेहफ़ूज़

ना दलित मेहफ़ूज़ ना पंडित मेहफ़ूज़

यह केसा राम राज ले आये तुम लोग

जहाँ इंसान तो नहीं बस शैतान मेहफ़ूज़

 

करते हो ज़ुल्म मेरी बच्चियों पर

ना देखते हो मज़हब जब

तुमको आता है इश्तेहाल उन पर

शर्मा, ख़ान, वाल्मीकि और  जॉन

गर चाहते हो अपनी बक़ा

तो शुरू करो नई तान

 

यह हाकिम है गद्दारों वाला

यह हाकिम है ज़ुल्म वाला

करता है बेरुन मुल्क ताजिरों से सांठ गाँठ

और अपने ही वतन के अवाम को बर्बाद

 

बच्चिओं को समझते हो अपना आँगन

चाक किया गिरबान जिनका और फाड़ दिया दामन

बेशर्मी की हद कर दी ख़ाकी ने

जब रोक दिया रिसाला (मीडिया)

 

ज़ुल्म जब हद से बढ़ जाए तुम्हारा,

इंसान भी बन जाए दहकता अंगारा,

महिलायें बन जाए दुर्गा

फिर हर बच्ची में देखेगी तुमको ज्वाला।


सभी बच्चियां  आज  हैं  एक साथ, 

सभी  महिलाओं की एक है आज आवाज़.  

सलाम  आप  सभी के जज़्बे को 

जिन्सी दहशत के खिलाफ दूर हुए 

आप सभी के इख़्तेलाफ़।  

 

जो ना बोला जिन्सी दहशत के खिलाफ 

आज वही कहलायेगा इंसानियत का सबसे 

बड़ा गद्दार


यह बच्चियां भी बड़ी मासूम होती हैं,

हर शख्स के आँख में अश्क़ देती हैं,

डोली उठे तो माँ रोतीं हैं,

अर्थी उठे तो हुकूमतें रोतीं हैं,

 

बेटी बचाओ एक नारा नहीं चूनौती थी।  

बेटी पढ़ाओ था एक इम्तेहान

तेरी चूनौती है अवामे हिन्द को मंज़ूर

रहा इम्तेहान तो देना होगा तुझको भी ज़रूर,

 

सहाफी जुबेर

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