आओ भक्तों तुम्हें डराए, दुआ जी की कहान से
उनकी बोली तुम्हे डराए उनके जाने के बाद भी,
गंदे हो जा नरम , गंदे हो जा नरम
गंदे हो जा नरम , गंदे हो जा नरम
उत्तर में दुखी हर बंदा, उनके जाने के बाद है,
दक्षिण में भक्तों को धोता उनका फ़लसफ़ा महान है
जमना जी के तट पर देखो साधू करता झूठा विलाप है
बात बात में उनकी हर बात में हर सज्जन करता विलाप है
देखो यह तस्वीर उनके गौरव और बलिदान की
उनकी बोली तुम्हे डराए उनके जाने के बाद भी,
गंदे हो जा नरम , गंदे हो जा नरम
गंदे हो जा नरम , गंदे हो जा नरम.
यह है अपना वीर दुआ जी संघियों को जिसने धोया था,
नपुंसकों की तलवारों को जिसने अलफ़ाज़ों से तोला था
बोलियों से इसने हर हर संघी का सीना चीरा
था।
बोल रही है हर शब्दों में क़ुर्बानी उनकी ज़ुबान
की
निडर दूआजी जी ने रख दी पत्रकारिता में नई जान
थी
उनकी बोली तुम्हे डराए उनके जाने के बाद भी,
गंदे हो जा नरम , गंदे हो जा नरम
गंदे हो जा नरम , गंदे हो जा नरम.
यह है उत्तर प्रदेश देखो "का" और किसानों
पर चली थी जहाँ गोलियां
संघी और भगवा ज़ालिमों ने जहाँ खेली थी ख़ून की होलियां
एक तरफ ख़ाकी हुकूमत के ज़ालिम चलाते दन दन गोलियाँ
दूसरी तरफ निहत्ते सहाफी दुआ और हक़ वालों की बोलियां
हर शहीद बोल रहा था इंक़लाब की बोलियां
यहाँ बिठा दिया किसी साधू ने रोड पर बहनों को ख़ास जमात की
उनकी बोली तुम्हे डराए उनके जाने के बाद भी,
गंदे हो जा नरम , गंदे हो जा नरम
गंदे हो जा नरम , गंदे हो जा नरम.
सहाफ़ी जुबेर
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