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10/12/2021

तेरी मोहब्बत में बड़ी है ताक़त।

अज़ीज़ नाज़रीन

आज की नज़म उस इश्क़ पर मबनी है जो दिखाई नहीं देता महसूस किया जा सकता है।  शायर ने इश्क़ की सिफ़त चिराग़ से बयान की है और माशूक़ को पतिंगे (परवाने) से शबी दी है।  अँधेरे में अदद चिराग़ रोशन करने पर जो रौशनी से फ़ैज़याब होता है वोह अतराफ़ या बाईद वाला होता है।और जो जितना नज़दीक होता है उसको जल जाना होता है।  नाज़रीन शायर का फ़लसफ़ा है इश्क़ में जितनी क़ुर्बात होगी उतनी अज़ीयत और तकलीफ होगी।  शमा के इर्द गिर्द रक़्स करने वाले परवाने जल जातें हैं।  वहीँ थोड़ी दूर बैठकर उस रोशन चिराग़ (माशूक़) का दीदार करने वाले फ़ैज़याब होते हैं।  क़ुरब में अज़ीयत है हिज्र में फलाह।  किसी ने ख़ूब कहा है. 

।।। चिराग़ तले अँधेरा ।।।

नाज़रीन शायर का मानना है सच्ची बेलौस मोहब्बत क़ुर्बानी पर यक़ीन रखती है।  चाहे वोह इश्क़े मजाज़ी हो या इश्क़े हक़ीक़ी; माशूक़ की खुशी के लिए आशिक़ क्या क्या क़ुर्बान कर सकता है, तभी फलाह मिलेगी।   इश्क़े मजाज़ी में आशिक़ अपनी मेहबूबा से इश्क़ का दावा करता है और बदले में उसको हासिल करना चाहता है।   इश्क़े हक़ीक़ी में आशिक़ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से इश्क़ का दावा करता है और हर अच्छे अमल के पीछे अपनी हाजत अल्लाह के सामने रख देता है।  यह इश्क़ नहीं हुआ यह तो कोरी तिजारत हुई, या Give & Take Policy  हम तुमको चाहतें हैं और तुम्हारी चाहत के लिए हम यह कर रहें हैं तो तुम हमारी चाहत के लिए यह करो।  सच्चा आशिक़ माशूक़ की खुशी के लिए ख़ुद अज़ीयत बर्दाश्त करता है तकलीफ सेहता है और उसको खुश देख कर तस्कीन पाता है।  माशूक़ की एक मुस्कराहट के लिए अपनी तमाम अज़ीयत को भूल जाता है।  ऐसे सच्चे आशिक़ों की फिर कोई हाजत नहीं, दिल में ख़्याल किया और हो गया. 

चिराग़े मोहब्बत रोशन कर लो,

तुम भी कभी खाक़ और नूर वाले से मोहब्बत कर लो,

हुआ बोहोत अँधेरा और सियाह दिल तुम्हारा

नदामत के अश्क़ों से इसको पाक कर लो। 

 

पत्थर कंकारियाँ हो गई, मंसूर जो अनल हक़ बोल उठे,

फ़क़त एक अदद कंकरी फौलाद बनी उनके जो सीने पे जा लगी

पुछा जो किसी ने मंसूर से पत्थर ने नहीं पहुंचाई ईज़ा इतनी

फिर क्यों फ़क़त एक कंकरी पर चीख़ उठे। 

 

 बोले नादान हैं जो मारते हैं पत्थर मुझको

होश वालों ने फिर क्यों मुझको दी यह सज़ा

हमने फिर आज बोल दिया तूने की थी

सच्ची मोहब्बत उसका अलग ही है मज़ा। 

 

तुम भी अपने दिलों में आतिशे मोहब्बत जला लो,

जो कभी  बुझे मोहब्बत की ऐसी शमा जला लो 

अगर इश्क़ है तो माशूक़ से मोहब्बत का करो इज़हार 

वोह हो जाएगा तुम्हारा, गर दुरुस्त हुआ तुम्हारा किरदार    

फिर जो चाहो मिलेगा पहले दिल से करो अपने गुनाहों का इक़रार  

 

बड़ी क़ुव्वत है तेरे इश्क़ में मौला 

खुशियों से भर दिया तूने मेरा झोला 

इधर तस्सव्वुर में इज़हार की दिल की हाजत 

कर दिया अधूरा काम पूरा।  


माशूक़ की मोहब्बत में है इतनी ताक़त 

तेरी छीन ली शिनाख़्त आपकी बदल दी इबादत 

आपको कर दिया शिद्दा उल कुफ़्फ़ार 

तुझको कर दिया मोहब्बत से बाहर 

जन्नत हो गई आपके ताबे तुझको कर दिया फ़ना फिन नार. 


सहाफ़ी जुबेर। 

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