वोह करतें हैं तनक़ीद मोहब्बत पर हमारी
हमारी सिर्फ़ क़लम तेज़ है पाक है मोहब्बत हमारी
इस ही ज़मीन की पैदावार है सियाही
तहरीर हुआ वही जो मिली हमें तोहफे में रौशनाई
शफ़्फ़ाफ़ ज़ेहन से जो देखा था तुमको
पूरी नहीं थी तुमको देखने की नज़र हमारी
हसरत दीदार ए यार की रही
तशनगी
हवस ना थी दरमियान में मोहब्बत
में हमारी
हमारी नफ़रत में भी पोशीदा है मोहब्बत
तुम्हारी मोहब्बत में भी है धोखा और ज़िल्लत
मोहब्बत का जूनून जो देखा हमने तुझमे
हमारी हर बात को हक़ जान ले लिया तूने दिल पे
तेरी मोहब्बत को सजदा करता है "ज़ुबेर"
मेरे इसरार पर हर तहरीर को
जो दोनों को मिला कर देखा तूने
निजात नहीं तुझको नस्ल ए आदम दुखो से ग़मों से
पस तू कर दे खुद को अपने माशूक़ के हवाले
तेरे हर दुःख का मुदावा है मुर्शिद
तेरी हर दर्द की दवा है मुर्शिद
मोहब्बत एक ऐसा मर्ज़ है जिसकी कोई दवा नहीं मिलती
माशूक़ के दीदार के सिवाय तबियत नहीं संभलती
जो मर्ज़ ए इश्क़ में हो गया फ़ना फिर उसको दुनियाँ नहीं मिलती
सहाफ़ी ज़ुबेर
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