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08/03/2024

हमारे अपने हैदराबादी भाईजान

 मुसलमानों की सियासी यतीमी ख़तम हो रही है

सियासी मुफ़लिसी दूर हो रही है।


हमारी सियासी ग़ुरबत और मुफ़लिसी का कौन है ज़िम्मेदार 

कभी हम हाकिम थे पर क्या कर दिया हमारा हाल   


जो समझतें हैं मुसलमानों को सियासी अछूत

वोट तो हमारा चाहिए पर नहीं क़ियादत हमारी मंज़ूर  

ऐसी तंज़ीमों के वोट पर करो चोट

 

ख़ुद अपने हाकिम बनो ख़ुद अपनी क़ियादत खड़ी करो

मजलिस करती है क़ियादत का वादा उसको करो वोट

 

१० फ़ीसद वाले वज़ीर ए आला बन गये

२ फ़ीसद वाले वज़ीर ए आज़म और दाखला बन गये

तुम १७ फ़ीसद हो कर भी दरी बिछाने कुर्सी लगाने वाले बन गये 

 

नामनिहाद समझते हैं मुस्लिम वोट को यतीमों का माल

जब चाहे डाका डालें, जब चाहें ज़ाफ़रानी करें उनको हलाल

 

ना ही उनकी हक़तल्फ़ी पर कोई बात हो

ना ही उनकी हलाकत पर करे कोई सवाल

जेलों में आबादी के तनासुब से ज़्यादा है ज़ेर ए समाअत मुसलमान

 

अब ना भय्या पर ज़रुरत है करने जवानी क़ुर्बान

ना ही ज़रुरत है मोहब्बत की दूकान के बनने ग़ुलाम

हमारे हक़ की जंग करेगें हमारे अपने हैदराबादी भाईजान 


तुमको शेरवानी से परहेज़ उनको बरियानी से गुरेज़ 

हैदराबाद में हलाल सब चलता नाइंसाफ़ी, हक़तल्फ़ी से हमें बेर 


सहाफ़ी ज़ुबेर

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