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02/07/2024

दिल मेरा शीशे सा नाज़ुक़

 शीशे के टूटने की आवाज़ सब ही ने सुनी

उस नुक़सान की तकलीफ़ सब ही को हुई

 

दिल मेरा शीशे सा नाज़ुक़ अनमोल क़ीमत

फ़िर भी ज़ालिम ने दिल मेरा इतनी ख़ामोशी से तोड़ा

किसी को कानो कान ख़बर ना हुई

 

जहाँ मामूली शीशे के टूटने की तकलीफ़ सभी को पहुँची

मेरे अनमोल दिल के टूटने की ईज़ा सिर्फ़ मुझको ही हुई

 

दुश्मन का अक्स भी एक था, जब तक शीशा सालिम रहा

शीशे के टूटते ही हर ज़ाविये से दुश्मन नज़र गया

टूटा शीशा दुश्मन पर दो धारी शमशीर साबित हुआ

 

माशूक़ की मोहब्बत ने मुझे तन्हा कर दिया

 फ़ितना अंगेज़ लोगों से दूर कर रब से रिश्ता जुड़ गया

 

कितने दर्द पोशीदा हैं क़ल्ब मोमीन मे

कहाँ की बात करूँ इराक़, लिबिया, अफ़ग़ान

हिंद, कश्मीर या जय फ़लस्तींन

जितना ज़ुल्म ज़ालिम का बढ़ता गया देख उम्मत का सब्र 

इस्लाम फ़ैलता गया बुलंद परवाज़ मोमीन करता गया

 

मिल्लत को बदलना होगी सरमायकारी

समझना होगी अपनी ज़िम्मेदारी

 किसी ग़ुलाम सोच की बोहोत सुन ली 

नहीं करेगें हम सियासतदारी

 

मौजूदा दौर मे ग़ुलाम शायर भी करता है वही बात

सुनते आये सबसे बस वही थोतली बकवास

हमारे मसले कितने हल किये 

अब तो होगी हिस्सेदारी की बात

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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