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23/02/2023

सुख़न शीरीं अलफ़ाज़

काश तेरा नाम भी मेरी चाहत सा होता

 तेरा नाम भी माशूक के नाम पर होता 

क्या ख़ूब होता मै तेरे नाम में उसका नाम लेता 

 तेरी सूरत में मेहबूब का चेहरा देखता  

 

तेरा दर्जा है दिल में बुलंद--बाला 

तेरे वोह सुख़न शीरीं अलफ़ाज़

हर बात याद आये बार बार 

 

ख़ुद ही से कर अमल--सालेह का आग़ाज़

बन जा अपने आबा--अजदाद का पैरोकार

तू चाह कर भी नहीं बदल सकता मशिय्यत इलाही

फिर क्यों ज़िद कर बैठा है फ़िज़ूल सी 

 

,एक ही सा है एहसास तेरा मेरा 

एक ही है प्यार तेरा मेरा

,एक ही है सहारा तू मेरा 

फिर क्यों है साथ ग़ैरों सा तेरा मेरा


टके सा जवाब ना दिया करो 

ख़ुलासे में बात ना किया करो 

सवाल किया करो तहरीरी 

जवाब भी तलब करो तहरीरी  

 

ख़िल्त-ए-सालेह है तू, मिल्लत का ज़ुल्फ़िक़ार

है तू ज़ालिम के लिए हैदर-ए-कर्रार 

मैदान ऐ जंग में असदुल्लाह ग़ालिब है तू 


तेरे चारो जानिब फ़रिश्तों का हिसार है बड़ा ही मज़बूत 

ज़ालिम की लाशें गिर गई मिटाने तेरा वजूद

परिंदे को करो बस क़ैद से आज़ाद 

ज़ाहिर होगा ज़िन्दगी का नया बाब 


सहाफ़ी ज़ुबेर

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