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29/04/2023

ग़ैरत और एहसास

 दिल नहीं है मेरा शिकस्ता वोह धड़कता है

हालात फ़रसूदा ना हैं मेरे एहसास अभी ज़िंदा है


ग़ैरत और एहसास की ही तो बात है

अदना से गुनाह के बोझ से कोई ग़ैरत से मर जाए 

बे-ग़ैरत गुनाह पर गुनाह किये जाए उसे मौत ना आये।    


झूट बोलो फ़रेब करो दग़ा दो पाओ जालसाज़ी से मर्तबा (डिग्री)  

ख़ातूनों की जासूसी करो और मसनद नशीन रहो आला 


मौत के ताजिर हो तुम पहनो ज़ाफ़रानी या सब्ज़ कुर्ता

सब एक ही सांप का ज़हर है 

क्या वज़ीर ए आला हो या वज़ीर ए दाख़िला

 

तेरे ज़हर से पुर आलूद हुई अमन की फ़िज़ा

मर्ज़ हुआ लाइलाज जब ख़श्म-आलूद हुआ अवाम 

ज़हर के बदले बेहतर था दे देता दवा।


कोई ज़िला बदर किया गया

किसी को बेरुन मुल्क दाख़िला की ना थी इजाज़त

मवादी क़ाश्तकारों की सड़कों को कर दो क़ैद 

 ज़हरीले कीड़ों को रेंगने में होने लगे दुशवारी 

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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