दिल नहीं है मेरा शिकस्ता वोह धड़कता है
हालात फ़रसूदा ना हैं मेरे एहसास अभी ज़िंदा है
ग़ैरत और एहसास की ही तो बात है
अदना से गुनाह के बोझ से कोई ग़ैरत से मर जाए
बे-ग़ैरत गुनाह पर गुनाह किये जाए उसे मौत ना आये।
झूट बोलो फ़रेब करो दग़ा दो पाओ जालसाज़ी से मर्तबा (डिग्री)
ख़ातूनों की जासूसी करो और मसनद नशीन रहो आला
मौत के ताजिर हो तुम
पहनो ज़ाफ़रानी या सब्ज़ कुर्ता
सब एक ही सांप का ज़हर है
क्या वज़ीर ए आला हो या वज़ीर ए दाख़िला
तेरे ज़हर से पुर आलूद
हुई अमन की फ़िज़ा
मर्ज़ हुआ लाइलाज जब ख़श्म-आलूद हुआ अवाम
ज़हर के बदले बेहतर था दे देता दवा।
कोई ज़िला बदर किया गया
किसी को बेरुन मुल्क दाख़िला की ना थी इजाज़त
मवादी क़ाश्तकारों की सड़कों को कर दो क़ैद
ज़हरीले कीड़ों को रेंगने में होने लगे दुशवारी
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