भारत देश के पड़े लिखे चौकीदार को समर्पित
सौगंध मुझे इस माटी की, डिग्री नहीं दिखाऊँगा
माफ़ी वीर ने गोरों के डर से ग़लती की
में उस बात को हरगिज़ ना दोहराऊंगा
ग़ुलामी की ज़ंजीरों में क़ैद रहूँगा
सौगंध में ऐसी लेता हूँ इल्म के तमाम केंद्रों को तबाह
कर के मानूंगा
में रहा अनपढ़ तमाम देश को जाहिल कर डालूँगा
भारत को भविष्य के सपने दिखा कर भूत काल में ले जाऊँगा
टाई लगा कर बन गए जनाब हीरो "
" पढ़ाई लिखाई में रहे ज़ीरो
वोह बेंच रहे थे भारत को में
बर्बाद कर के जाऊँगा
चाहे बना दो प्रदेश
का मुख्या, चाहे बना दो देश का मंत्री
गर्व होगा जब चौकीदार
ही कहलाऊंगा
क़ानून को अपना ग़ुलाम
बना कर संविधान की धज्जियाँ उड़ा कर
क़तल नाइंसाफी चोरी करना
मेरा मक़सद
चौकीदार के बजाये चोर
ही कहलाऊंगा
वाह रे रब्बा क्या इंसाफ़ है बलंद-बाला
जो मांगते थे कभी क़ाग़ज़ किसी से
आज वही भागते फिर रहे हैं डिग्री नहीं दिखाऊँगा
तमाम काले धंदे कर कब चौकीदार से तानाशाह बन जाऊँगा
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