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25/12/2024

जब ज़ुल्म ज़ालिम का हद से बढ़ गया

है हुकुम हर ख़ास आम बना ले

अपनी तन्हाई ज़िक्र इलाही से बेहतर

क़ैस के ऊपर कोई क़ैद नहींकहीं भी रहे

लैला की याद दिल में बसा कर

 

हम भी तनहा हो गए माशूक़ की याद दिल में बसा कर

तन्हाई में भी पाते है तवानाई उनका नाम ले कर

 

हर दम रहता है भरम उसके दीदार का

कहीं से वोह जाएँ पूछ लें हाल दिल बेक़रार का

 

जब ज़ुल्म ज़ालिम का हद से बढ़ गया

हर वोह बच्चा भी जंग में निकल गया

जिसको कभी आती नहीं थी अय्यारी

 

जंग की इस आतिश ने दुश्मन का हर क़िला तबाह कर दिया

हमारे ऊपर वही वहशत वही तन्हाई रही बाक़ी

 

पाक क़ुव्वत देख परेशान है नापाक क्यों कर

जंग में जब होंगे रू बरू असलाह डाल देगा ज़ालिम

माशूक़ के रुख़सार का नूर देख कर


९३ का ख़ूब बनाया लतीफ़ा एहल ए कुफ्र ने ७१ में 

तुम्हारे ऊपर अब हुकूमत पाक होगी तुम्हारी ग़फ़लत में 

 

फ़िर सजेंगी मेहफ़िलें दयार ए यार में

हर अवाम शामिल रहा जश्न शब आज़ादी में

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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