तेरी अदा की तारीफ़ करूँ या तेरे रुख़सार की
चेहरा तेरा शबनम के पाक क़तरों से धुला हुआ
रगंत तेरी गुलाब सी
बदला बदला सा
है रूप तुम्हारा
हर रूप में है
शरारत का इशारा
तस्वीरें न
बदलो इतनी ख़ुदारा
कोई हो जाएगा
तुम्हारा
एक पहेली है,
मुअम्मा है तेरा वजूद
पास हो कर भी तू है मुझसे दूर
तेरा आना जाना लगा रहता है मुल्क ए अदम से
तेरा अक्स दिख ही जाता है कभी पास कभी दूर
ना मेहरम हुए
अब हम तेरे लिए,
हवा है मेहरम
तुझपे बेअदब
कभी छूती है तेरे रुख़सार को कभी उड़ा ले जाती
ज़ुल्फ़ों की लट
क़यामत है अब भी
तेरी हर नाज़ ओ अदा
सूरज की किरण जाती है लिपट
एक हम ही हुए तेरे लिए पराये
पूरी कायनात अब भी है तुझ पर फ़िदा
सहाफ़ी ज़ुबेर
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