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05/12/2024

बदला बदला सा है रूप तुम्हारा

 तेरी अदा की तारीफ़ करूँ या तेरे रुख़सार की

चेहरा तेरा शबनम के पाक क़तरों से धुला हुआ

रगंत तेरी गुलाब सी


बदला बदला सा है रूप तुम्हारा

हर रूप में है शरारत का इशारा

तस्वीरें न बदलो इतनी ख़ुदारा

कोई हो जाएगा तुम्हारा


एक पहेली है, मुअम्मा है तेरा वजूद

पास हो कर भी तू है मुझसे दूर

तेरा आना जाना लगा रहता है मुल्क ए अदम से

तेरा अक्स दिख ही जाता है कभी पास कभी दूर


ना मेहरम हुए अब हम तेरे लिए,

हवा है मेहरम तुझपे बेअदब

कभी छूती है तेरे रुख़सार को कभी उड़ा ले जाती

ज़ुल्फ़ों की लट

 

क़यामत है अब भी तेरी हर नाज़ ओ अदा

सूरज की किरण जाती है लिपट


एक हम ही हुए तेरे लिए पराये 

पूरी कायनात अब भी है तुझ पर फ़िदा

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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