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20/03/2021

मेरा यक़ीन मेरा जूनून

तेरा इश्क़ जूनून की हद को पार कर रहा

मेरा यक़ीन तुझपर फ़ौलाद को पस्त कर रहा,

तू है बेवफ़ा ,

यह सोच कर गुनाहे अज़ीम कर रहा. 

मेरे फन और अलफ़ाज़ को न करो महदूत 

बिखर जाने दो मोतियों की तरह 

तेरे इश्क़ की मेहक को न करो क़ैद 

फ़ैल जाने दो फ़िज़ाओं में खुशबू की तरह 

मेरी मोहब्बत को न करो क़ैद 

उतर जाने दो दिल में रूह की तरह 

अलफ़ाज़ ही तो मेरे, हैं देते किसी को सुकून 

सुख़न शीरीं की तरह  



गुप चुप तू कब आ गई ख़मोशी से 

गुप चुप तू कब दिल में समा गई ख़ामोशी से 

ख़ामोश रहे तेरे अलफ़ाज़ तो क्या 

तेरे जज़बात हर बात बयान कर गए. 

भटक रहा है दर बदर इश्क़ में ज़ुबेर  

दुआ करो तुम भी, मिले उसको हदफ़ 

ज़रूर 

मंज़िलें दूर हैं तो क्या 

मिलेगा एक रोज़ तुम सा हमसाया 

ज़रूर ज़रूर 



ख़ुदा को तो देखा नहीं, 

उसके बन्दों में कभी कभी 

ख़ुदा का जलवा देख लेता हूँ 

 

तेरे रुख़सार को देख, 

कभी कभी ख़ुदा को याद 

कर लेता हूँ।  


सहाफ़ी जुबेर 

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