सिर्फ तेरी आँखों के लिए.
मेरी मोहब्बत ना मिटी है, ना मिटेगी कभी।।
यह वोह शमा है, ना बुझी है ना बुझेगी कभी।।
तेरे दिल में रहेगी जवां, फ़ौत हुई आरज़ू के जैसी
मेरे दिल में सुलगती रहेगी नासूर के जैसी।।
सहाफी जुबेर
कुछ दिनों से है ख़फ़ा ख़फ़ा सा उनका आना जाना
जब हम हो गए उनकी झील सी आँखों पर शायराना
उनको लगता है, थे हमारे अलफ़ाज़ क़ातिलाना।
क़ातिलाना है उनकी हर अदा
और करते हैं शिकवा हमसे सदा
जिगर के ज़ख्मों को जा कर दिखाए तो
किस किस को हम
उनकी तो हर अदा सर से पैर तक
बना चुकी है हमें दीवाना,
झील सी गहरी तेरी आँखे
इनमे डूब जाने को है जी चाहता
ज़ुल्फ़े हैं तेरी की थामें हुई हैं मेरी बाहें
झील है की डूबने नहीं देती
ज़ुल्फ़े हैं की मरने नहीं देती
चलो छोड़ो यह गिले शिकवे
हम तेरी आँखों पर क्या तेरे मुजस्समें
पर हैं मर मिटे,
अब तू ख़फ़ा रहे या रहे जुदा
हम तो रहेंगे तेरे सदा
तेरी आँखों को देख झील भी शरमाई है
तेरे रुखसार को देख
चाँद की रौशनी फीकी नज़र आई है
दो पंखुड़ियां गुलाब सी
तेरे होंठों में नज़र आई हैं
मेरे पास अलफ़ाज़ नहीं जो
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