हम ख़ुश हुए मुजाहिदीनों की कारगरदेगी देख कर
यहूद की दहशत को फोड़ डाला शैतानी असरात को तोड़ कर
ज़ाफ़रानी दहशत के ज़ालिमों, नाइन्साफ़, इज्तेमाई क़ातिल
बर्बरियत मस्जिदों, मदरसों की तोड़ फोड़ के ख़िलाफ़ एहतजाज पर
करते हो जंगी हिकमत ए अमली का आग़ाज़
कितनी गोलियां चलाओगे कितने सरों का लोगे भोग
जब हम निहत्ते आये एहतेजाज को तो तुम ने कियों मारी गोली हमको
अगर हमने बंदूक उठा ली तो बोहोत पछताओगे
बोहोत भारी पड़ेगी हमारी बंदूक की गोली तुमको
अगर जंग करने की है मर्ज़ी तो यहूद दहशतगर्दों की तरह
अल ऐलानियाँ करो जंग का एलान हमारे ख़िलाफ़
फ़िर देखो ना तुम बचोगे ना तुम्हारा कोई नाम ओ निशाँन
पीठ में खंजर उतारने की है तुम ज़ाफ़रानी दहशत की पुरानी फ़ितरत
याद रखो बाबर और अफ़ज़ल ख़ान ने चीर दिए थे तुम्हारे रहबर
ख़ौफ़ ऐसा हुआ है ग़ालिब तुम पर
इस्म ए बाबर, अफ़ज़ल ख़ान, औरग़ज़ेब आज भी डरातें हैं तुमको
तुम्हारी ज़ाफ़रानी पाठशालाओं में दे दिए शमशीरें हाथ में
हमारे मदरसों ने दे दिए क़लम और किताब साथ में
ज़हरीली काश्त की फसल है आज की हाकिमियत
मदरसों ने प्रेमचंद और कलाम दिए
ज़हर की काश्त ने दहशतगर्द गोडसे मोदी और योगी दिए
आज ज़ाफ़रानी दहशत से जो भगवा चादर पहने हैं
बाबर औरंगज़ेब के वक़्त सुन्नत करवा बैठे थे
आज ज़ालिम हाकिम है कल जाएगा,
मुनाफ़िक़ और डरपोक फ़िर अमन के साथ आयेगें
मुँह से हगने वाले ज़ाफ़रानी चोले वाले फ़िर सब्ज़ चोला पहनेगें।
ऐसे दल बदलू ग़द्दारों को याद रखना
इनको बरहना कर भगवा चोला उतार देना
ज़ाफ़रानी दहशत और ख़बीसों के ख़बीस हैं तुम्हारे मुक़ाबिल
तुम जंग की हिकमत और रूहानी फैज़ करो पुख़्ता
दुआ करो रब से नुसरत होगी तुम्हारा मुस्तक़बिल
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