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16/02/2024

मेरा यक़ीन मेरी सोच से बालातर है तेरे उपर

मेरा यक़ीन मेरी सोच से बालातर है तेरे उपर

तूने मुस्तुफ़ा को भेज दिया हिदायत दे कर

 

जहाँ अदल होता है उसको अदलिया कहतें हैं

जहाँ क़त्ल ए इंसाफ़ होता है उसको बूचड़खाना कहतें हैं

इन्साफ़ की कुर्सी पर फ़ाईज़ हर ना इन्साफ़

को हम दहशत का ग़ुलाम कहतें हैं


मेरा मुहिब्ब-ए-वतन क्यों फ़रेबी हो गया तेरी अदालत में आ कर 

क्यों तेरा जज़्बा ए इंसाफ़ फ़ौत हो गया अकसरियती अक़ीदा देख कर 


तुम्हारे यहाँ इंसाफ़ का क़त्ल किया जाता है अकसरियती अक़ीदे पर

बेगुनाह अफ़ज़ल को जुडिशल क़तल किया जाता है अकसरियती इसरार पर

 

ज़ालिमों अभी तुमने हमारा अज़्म देखा ही कहाँ है

कुछ नहीं हुआ ..... क्योंकि हमारे नौजवान ख़ामोश थे 

नहीं तो मुजाहिदों की नारा ए तकबीर की सदा बुलंद होते ही 

हमने ज़ालिमों का कलेजा फटते देखा है


हमारी नस्लों के मुस्तक़बिल का फ़ैसले ज़ालिम हुकुमरान नहीं करेगें 

हमको बर्बाद करने की तुमने कोई हद ना छोड़ी

हम बनेगें हाकिम हमारे फैसले हम ख़ुद करेगें


फ़रेबी धोकेबाज़ फ़रार होतें हैं बेरुन मुल्क से साजिशें करतें हैं 

सच्चे मुजाहिद जंग लड़ते हैं दुश्मन से मुक़ाबला करतें हैं 

पाक, मिल्लत की फ़लाह के लिए जो काम करतें हैं वहीँ हमदर्द होतें हैं


तुम क़त्ल कर देते हो हमारा नाम पूछ कर

हम तुम्हे भी अपना लेते हैं अल्लाह के नाम पर 


तुम फ़ुक़रा को भीक देते हो राम का नाम लेने पर 

हम भीक में ज़मीनें दे देतें बग़ैर तुम्हारा मज़हब पूछ कर 


सहाफ़ी ज़ुबेर

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