अभी सिर्फ़ इज़हार ए ख़याल का हुआ है बयान
जुम्मन उच्चक उच्चक निकल कर आने लगे बाहर
मजलिस से मुख़ालेफ़त पर हुए आमादा
कोई कहेगा फ़ायदा पहुचायेगा
कोई बताएगा "बी" टीम ज़ाफ़रान
नामनिहाद सेकुलरों की तो क्या है बात
अपना ग़ुलाम और फ़तह की हुई जागीर
समझते हैं हर मुसलमान
ज़ाफ़रानी तो है ही दुश्मन ए इस्लाम
काम करेगें सिफ़र ढिंढोरा पीटेंगे जग भर
मजलिस का तारी हुआ ख़ौफ़ मुनाफ़िक़ों के दरमियान
एवान और अवाम के सामने रुसवा होंगे यह और ज़ाफ़रान
नामनिहाद सेक्युलरों को ख़ूब आज़मा लिया
इनको मिल्लत की मौजूदा हालत का ज़िम्मेदार पा लिया
ज़ाफ़रानी दहशत है इन पर ऐसी हावी
मिल्लत का नाम लेने से हो जाती है इनको सर्दी
मुसलमानों की राये शुमारी पर एवान में जायेगें
मिल्लत के किसी भी मसले पर ख़ामोशी अपनाएगें
फ़तहयाब होंगें हमारी राये पर
काम करेगें ज़ाफ़रानी महाज़ पर
जब तुम हमारे मसले हल नहीं कर सकते
वोट के लिए कियों आगे पीछे हमारे फ़िरते
रहे मुसलमान हर दम ग़ाफ़िल
बस अपने भाई को दुश्मन जान कर
हर मीठा बोलने वाले को बना दिया हाकिम
हमारा वोट अब मिलेगा उसको
हाकिम बनाएगा अब से जो हमको
क़ियादत हमारी करना होगी क़ुबूल
नहीं तो वोट की भीक जाओ भूल
यही है सेकुलरों की तुमसे दुश्मनी
टोपी पहनेगें साथ तुम्हारे खजूर खा कर तस्वीर डालें
ईद पर मीठा बोल कर कटार तुम्हारे पीठ में उतारे
तुम्हारा भाई कड़वा लाख तुमसे बोले, वक़्त पढ़ने पर तुम्हारे हक़ में वही बोले
हक़ बात हर दम होती कड़वी, मीठा बोलने वाले साथ छोड़ भागे
मेरी मजलिस मेरी मुहाफ़िज़, मिल्लत के मुद्दे सिर्फ़ वोह ही उठाती
जुम्मन नोनिहाद सिर्फ़ तनक़ीद करते
वक़्त आने पर मुसलमान नाम लेने से डरते
हर दुःख हर ग़म की साथी मजलिस देगी नाइन्साफ़ी से आज़ादी
सहाफ़ी ज़ुबेर
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