जंग का आग़ाज़ है तेरा गिरफ़्तार होना
तक़सीम के बाब पर है मुल्क ए हिन्द का होना
कुफ़्र ने कर ली बोहोत अपनी मन मानी
गर अब नहीं तो कभी नहीं होगा जिहाद का लाज़िम होना
गिरफ़्तारी से क्या डराते हो तुम हमको ज़ालिमों
मौत से क्या डराते हो तुम हमको काफ़िरों
मुसलमान के बच्चे बच्चे में है जज़बा
शहीद होना या ग़ाज़ी होना
जमहूरियत या हिन्द के नाम पर जो भेजते थे पैग़ाम ए मुबारकबाद
तबाही मुक़द्दर है हिन्द के लिए
किसी भी मुल्क की फ़लाह के लिए
ज़रूरी है अदलिया, हाकिम का आदिल होना
जो नहीं मानते इस्लामिक फ़तवे की हक़ीक़त
ज़रूरी है जंग में ऐसे मुनाफ़िक़ों का सर क़लम होना
ए मुसलमां किस बात का है तुझको ख़ौफ़ किस बात का है ग़म
हर शेवा में सुन्नत अदा करते हैं हम
गर गिरफ़्तार हुए तो यूसुफ, फ़तह हुए तो ख़ालिद, हुसैन का जाम ए शहादत
हर ज़ुल्म के बाद बुलंद होगा सब्ज़ परचम
मुस्लिम नाम से जो करते रहे बदबख़्ती काफ़िर हो कर
जो तुम्हारे अंदर रहे दीमक के माफ़िक़ मुनाफ़िक़ हो कर
अबू जेहल, अबू लहब, पृथ्वी या राणा
इनकी नस्लों को फ़िर से हल्दी घाटी याद दिला दो तारीख़ बता कर
इस ज़ालिम बादशाहत के ख़िलाफ़ हर नस्ल का लहू मार रहा है जोश
हिन्द के टुकड़े टुकड़े होना है लाज़िम उठेगा जब नौजवन झुकेगा सिरमौर
पस जिन्होंने जंग में तुम्हारा साथ दिया हिन्द के टुकड़े पर उसका नाम लिख देना
होश वालों ज़हानतवालों ज़ाफ़रानियों से मोहताद रहना
ग़द्दारी करना है इनकी फ़ितरत
धोखा देना दग़ा देना है इनकी आदत
हुकूमत के लिए इनकी सक़ाफ़त अपने ही भाई का क़त्ल करना जेल करना
बेईमानी से हाकिम होने का जिसको है लालच,
तुम्हारे मज़हब को देख ना करेगें तुम्हारी हिमायत
आज नहीं लड़े तो कल होगी तुम्हारी आफ़त
सहाफ़ी ज़ुबेर
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