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26/02/2024

हमज़ाद मेरा फ़रिश्ते सा अहबाब हो गया

 हमज़ाद मेरा फ़रिश्ते सा अहबाब हो गया

क़ाबू नफ़्स पर किया, रब से रिश्ता जुड़ गया


जब मिला साथ मोरे प्रियतम का 

तू ही मेरा मुहाफ़िज़ तू ही मेरा मौला हो गया


किसी ज़ईफ़ को ताक़त फ़राहम करता है शैतान

तुम्हारे शबाब को ताक़त देता है रेहमान

शैतान की क़ुव्वत लाती है तबाही और बर्बादी 

रहमानी क़ुव्वत देती है बुलंद परवाज़ और फ़लाही

 

उनको क्या ख़ौफ़ शैतानी, फ़ौलादी हैं जिनके इरादे और क़ुव्वत रूहानी

अपना रास्ता शेर क्यों बदले कुत्तों के भोकने से नफ़सानी


तेरी सरकशी हुज्जत में भी हिकमत थी मेरे रब की

सब कुछ बता कर बिल आख़िर शिकस्त है शैतान की


तुमको महसूर बना लिया उसकी फ़ितरत शैतानी

आओगे जब तिलिस्म से बाहर होगा पछतावा क्या कर बैठे नादानी


क़तरा क़तरा गंदा पानी बहा बेहर के जो साहिल से मिला 

ग़लीज़ क़तरा भी पाक हो गया जो शफ़्फ़ाफ़ पानी में बहा 


गुनाह मेरे अश्कों में बह गए 

रूह और जिस्म  मुजल्ला हो गया जो प्रीतम का साथ मिला 


आतिश ए हवस तो ख़ुनक हो गई परवाज़ जब मिली 

दीदार की तश्नगी मज़ीद बढ़ गई माशूक़ से बिरहा जो मिली

 

सहाफ़ी ज़ुबेर

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